स्वामी दयानन्द सरस्वती जीवनी – Biography of Dayananda Saraswati in Hindi Jivani

आपको बता दे स्वामी दयानन्द सरस्वती उन्नीसवीं सदी समाज सुधारक, मार्गदर्शक तथा एक महान देशभक्त थे, जिन्होंने सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करके समाज में आर्य समाज की स्थापना की थी। ये जाति से एक ब्राह्मण थे। इन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन लोगों को उपदेश और ज्ञान देने में समर्पित कर दिया जिससे संसार सत्य के मार्ग ... Read more

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Reported by Saloni Uniyal

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आपको बता दे स्वामी दयानन्द सरस्वती उन्नीसवीं सदी समाज सुधारक, मार्गदर्शक तथा एक महान देशभक्त थे, जिन्होंने सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करके समाज में आर्य समाज की स्थापना की थी। ये जाति से एक ब्राह्मण थे। इन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन लोगों को उपदेश और ज्ञान देने में समर्पित कर दिया जिससे संसार सत्य के मार्ग पर चल सके। ये मूर्ति पूजा का विरोध करते थे और कहते थे ओमकार निराकार में भगवान का जीवन संभव है। ये वैदिक धर्म का प्रचार-प्रसार करते थे और इस धर्म को सर्वोत्तम धर्म मानते थे। समाज के उत्थान के लिए ये एक सन्यासी बन गए। इन्होंने समाज में बाल विवाह का विरोध, महिलाओं के लिए सामान अधिकार, सती प्रथा जैसे कई सामाजिक कार्य किए। आज इस लेख में हम आपको स्वामी दयानन्द सरस्वती जीवनी (Biography of Dayananda Saraswati in Hindi Jivani) से सम्बंधित जानकारी साझा करने जा रहे है, अतः इस आर्टिकल के लेख को अंत तक अवश्य पढ़ें।

स्वामी दयानन्द सरस्वती जीवनी - Biography of Dayananda Saraswati in Hindi Jivani
स्वामी दयानन्द सरस्वती जीवनी

स्वामी दयानन्द सरस्वती जीवनी

स्वामी दयानन्द सरस्वती का जन्म गुजरात राज्य के टंकारा में एक ब्राह्मण परिवार में 12 फरवरी 1824 हुआ था। इनके पिता का नाम अम्बाशंकर तिवारी तथा माता का नाम अमृत बाई था जो कि एक गृहिणी थी। इनको बचपन में शंकर तिवारी नाम से पुकारा जाता था परन्तु इनका वास्तविक नाम महर्षि दयानन्द सरस्वती था। इनके पिता एक कर कलेक्टर थे, आर्थिक रूप से संपन्न परिवार में इन्हें किसी भी चीज की कमी महसूस नहीं हुई।

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Biography of Dayananda Saraswati in Hindi Jivani

नाम स्वामी दयानन्द सरस्वती
वास्तविक नाम महर्षि दयानन्द सरस्वती
जन्म 12 फरवरी 1824
जन्म स्थान टंकारा
गुरु विरजानन्द
शिक्षा वैदिक शिक्षा
कार्य समाज सुधारक
उपलब्धि आर्य समाज के संस्थापक
मृत्यु 30 अक्टूबर 1883
माता का नाम अमृत बाई
पिता का नाम अम्बाशंकर तिवारी

एक घटना ने जीवन को बदला

एक सन्यासी एवं समाज सुधारक बनने के पीछे एक बहुत बड़ी घटना थी उस समय महर्षि दयानन्द सरस्वती एक बालक थे। एक दिन की बात है शिवरात्रि का त्यौहार था और स्वामी जी अपने परिवार के साथ मंदिर में पूजा करने के लिए गए हुए था और उस मंदिर में जागरण हो रहा था रात के समय उनके परिवार के सदस्य सो गए लेकिन स्वामी जी उठे हुए थे और सोच रहें थे कि उनके द्वारा चढ़ाए हुए प्रसाद को खाने के लिए भगवान शिव जरूर यहां पर प्रकट होंगे। और इसका इन्तजार करते हुए वे पूरी रात उठे हुए थे परन्तु ऐसा कुछ ना हुआ, भगवान को चढ़ाया हुआ प्रसाद चूहे खा रहे थे। यह सब देखकर वे अत्यंत दुखी हुए और कहने लगे जब भगवान अपने प्रसाद को सुरक्षित नहीं कर पाएं तो वे समाज की रक्षा कैसे करेंगे। यही कारण था कि स्वामी जी मूर्ति पूजा का विरोध करते थे उन्हें यह बिल्कुल भी पसंद ना था इस घटना ने उन के सम्पूर्ण जीवन को परिवर्तित कर दिया।

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गुरु विरजानन्द जी का प्रभाव

स्वामी जी कुछ कार्य से उत्तर भारत गए थे और वहां उनकी मुलाकात गुरु विरजानन्द जी से हुई थी, उनकी बातों से स्वामी जी अत्यधिक प्रभावित हुए एवं अपना गुरु बना लिया, गुरु विरजानन्द जी ने भी उन्हें अपना शिष्य स्वीकार कर लिया। गुरु ने अपने शिष्य को योग शास्त्र के ज्ञान के साथ वैदिक शास्त्रों का भी अध्ययन कराया। ज्ञान प्रदान करने के पश्चात स्वामी जी ने गुरु दक्षिणा के लिए जब कहा, तो इनके गुरु विरजानन्द जी ने अपने लिए कुछ ना मांगते हुए कहा कि तुम एक समाज सुधारक बनो, समाज में बुराइयों का अंत, अन्धविश्वास को खत्म करना एवं लोगों को वैदिक शास्त्रों का ज्ञान देना आदि को ही मेरी गुरु दक्षिणा समझ लो।

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यह सब सुनने के बाद स्वामी अपने कार्य के लिए यात्रा करने लगे एवं सर्वप्रथम वैदिक धर्म का प्रचार करने लगे। इन्होंने सामाजिक कुरीतियों का जमकर विरोध किया एवं आर्य समाज की स्थापना भी की। यह कार्य करना इतना आसान नहीं था बल्कि उन्हें कई अपमान एवं परेशानियां सहन करनी पड़ी तब जाकर यह कार्य संभव हो पाया।

आर्य समाज की स्थापना

महर्षि ने 10 अप्रैल 1857 को गुड़ी-पड़वा के दिन मुंबई में आर्य समाज की स्थापना की थी। महर्षि द्वारा आर्य समाज को स्थापित करने की मुख्य वजह मानव सेवा, सामाजिक सेवा, ज्ञान एवं उपदेश प्रदान करना था अर्थात इस धर्म का उद्देश्य मानव कल्याण ही या कहे मानव धर्म ही था। तथा एक और वजह थी कि जो पुजारी थे वे हिन्दुओं को आत्म सुधार के लिए व्याकुल कर रहे थे। इसलिए स्वामी जी ने लोगों को भगवान के बारे में शुरू कर दिया वे भगवान के बारे में इधर-उधर जाकर ज्ञान देते थे इसके अतिरिक्त वेद क्या है इन सब की जानकारी देते थे। वे कहते थे कि हमें वैदिक जीवन जीना चाहिए और वेदों को अच्छे से पढ़ना चाहिए।

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स्वामी के खिलाफ षड़यंत्र

जैसा कि हमने आपको बताया कि स्वामी जी एक समाज सुधारक थे जो अंग्रेजी शासन का भी विरोध करते थे और इनकी प्रसिद्धि पूरे भारत के साथ विश्व में भी होने लगी। जिस कारण अंग्रेजों को अपनी हार के लिए चिंता होने लगी, और इसलिए अंग्रेजों ने उन पर निगरानी रखते थे कि ये कब क्या वाले है, कहाँ जाने वाले है। स्वामी जी अंग्रेजों का खुलकर बिना डरे विरोध करते थे, उन्होंने कभी भी किसी भी अंग्रेज ऑफिसर के सामने हार नहीं मानी निरंतर उनके ही सामने वे उनका जमकर विरोध करते थे, ये एक सच्चे देशभक्त थे। अंग्रेजों को अपने शासन के लिए भय हुआ और वे महर्षि को मारने का षड़यंत्र रचने लगे। एक बारे स्वामी जी को जहर दिया गया ताकि वे अपने प्राण त्याग दे परन्तु योग पारंगत में होने के कारण उन्हें कुछ भी नहीं हुआ एवं कई बार उनकी हत्या की योजना बनाई गई।

सामाजिक कार्य

मानव समाज के उत्थान के लिए महर्षि स्वामी जी ने समाज में कई बुराइयों का अंत किया जिससे समाज में व्याप्त कुरीतियां खत्म हो सके उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन मानव के हित के लिए योगदान दे भर दिया। सामाजिक सुधार नीचे निम्न प्रकार से बताए हुए है-

1. नारी शिक्षा एवं समानता-

समाज में महिलाओं को सामान अधिकार मिले इसके लिए स्वामी जी ने हमेशा आवाज उठाई, वे कहते थे कि समाज में नारियों का सम्मान करो उन्हें शिक्षा उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है। महिलाओं के लिए गलत भावनाएं ना रखें उन पर अत्याचार ना करें।

2. विधवा पुनर्विवाह-

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पहले ज़माने में समाज में जब कोई महिला विधवा हो जाती थी तो उसे दूसरा विवाह करने का कोई अधिकार नहीं था और ऐसा करना लोगों को पसंद भी नहीं था। परन्तु स्वामी जी ने लोगों को इसका सही अर्थ बताकर दूसरा विवाह करने में कोई भी बुराई नहीं है, विधवा महिला को समाज में जीने का पूरा अधिकार है।

3. सती प्रथा का विरोध-

समाज में जब भी किसी व्यक्ति की मृत्यु होती थी तो उसकी धर्मपत्नी को उसकी चिता के साथ जला दिया जाता था इस प्रथा को सती प्रथा कहते थे जिससे महिलाओं को कई कष्ट सहन करने पड़े। ऐसा माना जाता था कि पति की आत्मा को तब शांति मिलेगी जब उसकी जीवित पत्नी भी उसके साथ चिता में जल जाएगी। यह एक कुप्रथा थी जिसको समाज में समाप्त करने के लिए स्वामी जी ने बहुत प्रयास किए और लोगों को जागरूक किया।

4. सामाजिक एकता-

जैसा कि आप सभी जानते है कि भारत देश विभिन्नताओं से भरा देश है जहां अनेक धर्म एवं वर्ग के लोग रहते है और यह कई सदियों से चला आ रहा है, वे चाहते थे कि समाज में हिन्दू, जैन, सिख, ईसाई एवं मुस्लिम साथ मिलकर रहें एवं एक ही भगवान की पूजा करें, परन्तु यह सपना वे पूरा ना कर सके।

5. बाल विवाह-

पहले समाज में बाल विवाह कुप्रथा का बहुत प्रचलन था इसमें बच्चों का विवाह छोटी सी उम्र में कर दिया जाता था जिस उम्र में बच्चे खेलते है उस उम्र में बच्चों को गृहस्थी संभालने के लिए दे दी जाती थी जिसके कारण वे अपना बचपन खुलकर नहीं जी पाते थे। महर्षि स्वामी जी ने इस प्रथा की कड़ी आलोचना एवं विरोध किया और समाज में विवाह के लिए सही उम्र को बताया।

पुस्तकें एवं साहित्य

  • सत्यार्थप्रकाश
  • संस्कारविधि
  • ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका
  • व्यवहारभानु
  • वेदांगप्रकाश
  • ऋग्वेद भाष्य
  • आर्याभिविनय
  • यजुर्वेद भाष्य
  • संस्कृतवाक्यप्रबोध
  • चतुर्वेदविषयसूची
  • अष्टाध्यायीभाष्य
  • गोकरुणानिधि
  • भ्रान्तिनिवारण
  • आर्योद्देश्यरत्नमाला

स्वामी दयानन्द सरस्वती जीवनी से सम्बंधित प्रश्न/उत्तर

Dayananda Saraswati का जन्म कब हुआ था?

इनका जन्म 12 फरवरी 1824 को टंकारा में हुआ था।

स्वामी दयानन्द सरस्वती का असली नाम क्या था?

इनका असली नाम महर्षि दयानन्द सरस्वती था।

स्वामी दयानन्द सरस्वती ने किस समाज की स्थापना की थी?

इन्होंने वर्ष 1875 में आर्य समाज की स्थापना की थी।

Dayananda Saraswati की मृत्यु कब हुई?

इनकी मृत्यु 30 अक्टूबर 1883 ईसवी में हुई थी।

महर्षि दयानन्द सरस्वती की माता का नाम क्या था?

इनकी माता का नाम अमृत बाई था।

Dayananda Saraswati के गुरु कौन थे?

विरजानन्द इनके गुरु थे।

इस लेख में हमने Biography of Dayananda Saraswati in Hindi Jivani से जुड़ी सभी जानकारी को प्रदान कर दिया है यदि आप इस लेख से सम्बंधित कोई प्रश्न या अन्य जानकारी पूछना चाहते है तो आप नीचे दिए हुए कमेंट सेक्शन में अपना प्रश्न लिख सकते है हमारी टीम द्वारा जल्द ही आपके प्रश्नों का हल दिया जाएगा। उम्मीद करते है कि आपको हमारा लेख अवश्य पसंद आया होगा। इसी तरह से अन्य विषय की जानकारी जानने के लिए हमारी साइट hindi.nvshq.org से जुड़े रहें।

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