खाद्य श्रृंखला किसे कहते है? उत्पादक व उपभोक्ता | Food Chain in Hindi

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Reported by Rohit Kumar

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हमारे आसपास के पर्यावरण और पृथ्वी पर व्याप्त सभी जीव जन्तुओं के एक साथ जीवन निर्वहन के लिये खाद्य श्रृंखला का होना परम आवश्यक है। इसीलिये आज हम आपको खाद्य श्रृंखला के बारे में बताने जा रहे हैं। इस लेख में आप पढेंगे कि खाद्य श्रृंखला किसे कहते है Food Chain in Hindi और खाद्य श्रृंखला में उत्पादक और उपभोक्ता का क्या महत्व है। विस्तृत जानकारी के लिये इस लेख को अंत तक अवश्य पढें।

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खाद्य श्रृंखला किसे कहते है

खाद्य श्रृंखला से तात्पर्य हमारे पर्यावरण और हमारे पारिस्थिति तंत्र में होने वाले आहार के वितरण से है। खाद्य श्रृंखला हर तंत्र में जैसे जलीय तंत्र, स्थलीय तंत्र और मंडलीय तंत्र के लिये बहुत ही महत्वपूर्ण व्यवस्था है। सभी तंत्रों में समानता को देखें तो मुख्यत कुछ समानतायें लगभग सभी तंत्रों में पायी जाती हैं। इन्हें दो तरह से बांटा जाता है। पहला है चराई खाद्य श्रृंखला जिनमें कि प्राथमिक और द्वितीयक श्रेणी में शाकाहारी से तृतीय श्रेणी में मांसाहारी जीव आते हैं। इसी प्रकार द्वितीय श्रेणी प्रथम श्रेणी पर और तृतीय श्रेणी द्वितीय श्रेणी पर निर्भर होती है।

खाद्य श्रृंखला किसे कहते है? उत्पादक व उपभोक्ता | Food Chain in Hindi
खाद्य श्रृंखला किसे कहते है? उत्पादक व उपभोक्ता Food Chain in Hindi

प्राथमिक उत्पाद (Primary Product)

प्राथमिक उत्पाद मे कवक और जीवाणु तथा मुख्यत पौधे और उनसे जुडे उत्पाद आते हैं। यह सबसे प्रथम श्रेणी के जीव अथवा उत्पाद हैं। जैसे कि पौधे सूर्य की उपस्थिति में प्रकाश संश्लेषण की सहायता से अपना भोजन निर्मित करते हैं। इन पौधों और इनसे प्राप्त होने वाले उत्पादों को शाकाहारी जीव भक्षण करते हैं। इन शाकाहारी जीवों का भक्षण मांसाहारी जीव करते है। इस प्रकार से प्राथमिक उत्पादों में सामान्यत पेड पौधे, पत्तियां और इनसे सम्बन्धित उत्पाद आते हैैं।

इसके साथ ही प्राथमिक उत्पाद एक समय में एक से अधिक खाद्य जाल का हिस्सा हो सकता है। जैसे कि एक पौधे को शाकाहारी जंतुओं में विभिन्न प्रजातियों के द्वारा भक्षण किया जा सकता है। इस प्रकार से यह एक नेटवर्क है जिसकी शुरूआत प्राथमिक जीवों के साथ होती है। उदाहरण के लिये घास या पौधे को खरगोश, टिड्डी और गाय या अन्य स्तनधारी जीव उपयोग में लाते हैं। लेकिन इनके उपर तृतीय श्रेणी के मांसाहारी जीव अलग अलग हो सकते हैं। इसलिये खाद्य श्रृंखला के औचित्य के लिये प्रथम श्रेणी या प्राथमिक उत्पादों को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है।

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द्वितीयक श्रेणी (secondary class)

  • प्रथम श्रेणी और तृतीय श्रेणी के मध्य में स्थित होने के कारण द्वितीय श्रेणी के उत्पाद या जीवों का महत्वा काफी महत्वपूर्ण हो जाता है। क्योंकि यह हमारे पारिस्थितिकी तंत्र में एक संतुलन लाने का कार्य करते हैैं। सामान्यत इस श्रेणी में हमें अधिकतर शाकाहारी जीव ही मिलते हैं। जो कि पेड पौधे, उनकी पत्तियों और उनसे सम्बन्धित उत्पादों का भक्षण करते हैं। और इसी श्रृंखला पर पूर्ण रूप से निर्भर रहते हैं। दूसरी ओर तृतीय श्रेणी के जीव भी अपने जीवन और अहार के लिये इन पर पूर्ण रूप से निर्भर होते हैं।

तृतीयक श्रेणी (Tertiary class)

  • तृतीयक अथवा तृतीय श्रेणी में सामान्यत मांसाहारी जीव शामिल होते हैं। जो कि शाकाहारी जीवों का शिकार अथवा अन्य माध्यमों से भक्षण करते हैं। साथ ही इस श्रेणी में अधिकांशत सर्वाहारी जाति को भी रखा जाता है। सर्वाहारी का अर्थ है कि जो प्राथमिक श्रेणी के उत्पादों का भी भक्षण करते हैं और इसी के साथ द्वितीय श्रेणी के शाकाहारी जीवों का भी भक्षण करते हैं। सर्वाहारी जीवों की श्रेणी में मनुष्य को मुख्य रूप से गिना जाता है।

खाद्य श्रृंखला की विशेषतायें

  • खाद्य श्रृंखला एक प्रकार से समस्त जीवों मध्य पायी जाने वाली वह श्रृंखला है, जिसमें कि एक श्रेणी के जीव के भक्षण और उपयोग के आधार पर ही दूसरी श्रेणी और जीवों का जीवन टिका होता है।
  • प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक जीवों की संख्या में संख्यात्मक संतुलन होता है। जिससे कि यह खाद्य श्रृंखला अनवरत जारी रहती है।
  • समुदाय के संदर्भ में खाद्य श्रृंखला में उत्पाद, उपभोक्ता और अपघटक मुख्य रूप से शामिल होते हैं।
  • मुख्य रूप से यह एक सरल प्रक्रिया है। किन्तु विभिन्न परिस्थितियों में यह खाद्य श्रृंखला एक खाद्य जाल के रूप में बदल जाती है। जो कि काफी जटिल प्रक्रिया है।
  • हमारे पर्यावरण में जीवों की तुलनात्मक संख्या और पारिस्थितिकी तंत्र के लिये खाद्य श्रृंखला एक बेहद महत्वपूर्ण घटक है।

खाद्य श्रृंखला का महत्व

Food Chain खाद्य श्रंखला हमारे पारिस्थितिकी तंत्र और इस पृथ्वी पर सभी जीवों के सह अस्तित्व के लिये बहुत ही महत्वपूर्ण है। क्योंकि इस श्रृंखला में प्रत्येक स्थान पर आने वाला जीव अपने स्थान पर एक प्रकार से अद्वितीय होता है और उसका स्थान कोई अन्य जीव या अन्य श्रेणी का जीव नहीं ले सकता है। इस प्रकार खाद्य श्रंखला अपने आप में एक अद्वितीय और सबसे आधार मूलक व्यवस्था है। इस व्यवस्था में क्रमबद्व तरीके से एक जीव के द्वारा दूसरे जीव का भक्षण और उपयोग किया जाता है।

जैसे कि पौधों का प्रकाश संश्लेषण के द्वारा अपना भोजन तैयार करना द्वितीय श्रेणी के जीवों के जीवन का आधार है। इसी प्रकार से द्वितीय श्रेणी के शाकाहारी जीवों का होना तृतीय श्रेणी के मांसाहारी जीवों के जीवन का आधार है। इस प्रकार से एक व्यवस्थित खाद्य श्रृंखला का होना हमारी समूची पृथ्वी पर जीवन को बनाये रखने के लिये परम आवश्यक है।

उत्पादक और उपभोक्ता (producer and consumer)

खाद्य श्रृंखला में प्रथम श्रेणी के पौधोें और वनस्पितियों को सामान्यत उत्पादक कहा जाता है। क्योंकि इन्हीं उत्पादों से खाद्य श्रृंखला की शुरूआत होती है। इस श्रेणी में सभी प्रकार की वनस्पतियां आती हैं। यह पौधे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया के द्वारा अपने भोजन का निर्माण स्वयं करते हैं। इसीलिये यह पोषण और जीवन के आधार के लिये किसी अन्य जन्तु अथवा प्रजाति के उपर निर्भर नहीं रहते है। वहीं श्रृंखला के द्वितीयक और तृतीयक श्रेणी में आने वाले जीव जन्तुओं और प्रजातियों को उपभोक्ता की श्रेणी में रखा जाता है। क्योंकि यह दोनो श्रेणियां अन्य जन्तुओं और उत्पादों के उपर अपने जीवन निर्वहन के लिये निर्भर रहते हैं। और स्वयं से न तो कुछ उत्पन्न करते हैं और न ही निर्माण करते हैं। जिसे कि आहार के तौर पर उपयोग में लाया जा सके।

खाद्य श्रृंखला के उपभोक्ता

प्रथम श्रेणी के उपभोक्ताद्वितीय श्रेणी के उपभोक्तातृतीय श्रेणी के उपभोक्ता
सभी शाकाहारी जन्तु प्रथम श्रेणी के उपभोक्ता होते हैं। शाकाहारी जन्तु वनस्पतियों का भोजन के रूप में प्रयोग करते हैं। उदाहरण के लिए – खरगोश, गाय, भैस, बकरी, हिरण, चूहा, बन्दर, हाथी, जिराफ, नीलगाय आदि।वे सभी जन्तु जो भोजन के लिए प्रथम श्रेणी के उपभोक्ताओं पर निर्भर होते हैं उन्हें द्वितीय श्रेणी के उपभोक्ताओं के वर्ग में रखते हैं। ये मांसाहारी होते हैं। उदारण के लिए – मेढक, मछलियाँ, कीट पतंगों को खाने वाले पक्षी और जन्तु, छिपकली इत्यादि।वे सभी जन्तु जो भोजन के लिए द्वितीय श्रेणी के उपभोक्ताओं पर निर्भर होते हैं उन्हें शीर्ष श्रेणी के उपभोक्ता कहते हैं। जैसे – बाज, गिद्ध, शेर, भालू इत्यादि।

Food Chain से सम्बन्धित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खाद्य श्रृंखला के कितने चरण होते हैं?

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मुख्य रूप से खाद्य श्रृंखला को तीन चरणों या श्रेणियों में बांटा जाता है। प्राथमिक श्रेणी, द्वितीयक श्रेणी और तृतीयक श्रेणी।

खाद्य श्रृंखला का दूसरा नाम क्या है?

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Food Chain-खाद्य श्रृंखला को सामान्यत आहार चक्र के नाम से भी जाना जाता है।

खाद्य श्रृंखला की श्रेणियां क्या हैं?

उत्पादक, शाकाहारी, मांसाहारी और सर्वाहारी खाद्य श्रृंखला की मुख्य श्रेणियां है। इन्हें प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक श्रेणी के रूप में भी जाना जाता है। इसके अलावा अंत में अपघटक अथवा निवारकों का स्थान आता है।

खाद्य श्रृंखला में सबसे उपर कौन आता है?

सामान्यत मांसाहारी जीवों के साथ ही सर्वाहारी जीवों को भी खाद्य श्रृृंखला में सबसे उपर स्थान दिया जाता है।

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