गणेश चतुर्थी पर निबंध: Ganesh Chaturthi Essay In Hindi

भारत देश त्योहारों का देश है यहाँ हर धर्म के लोग बड़ी धूम-धाम से त्यौहार मानते हैं। अनेकता में एकता का यह मिश्रण भारत जैसे देश में ही देखने को मिलता है। प्रत्येक साल हर धर्म से जुड़े लोगों द्वारा कोई न कोई त्यौहार मनाया जाता है, त्योहारों में सांस्कृतिक, धार्मिक, सामाजिक त्यौहार आते हैं, ... Read more

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Reported by Dhruv Gotra

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भारत देश त्योहारों का देश है यहाँ हर धर्म के लोग बड़ी धूम-धाम से त्यौहार मानते हैं। अनेकता में एकता का यह मिश्रण भारत जैसे देश में ही देखने को मिलता है। प्रत्येक साल हर धर्म से जुड़े लोगों द्वारा कोई न कोई त्यौहार मनाया जाता है, त्योहारों में सांस्कृतिक, धार्मिक, सामाजिक त्यौहार आते हैं, धार्मिक त्यौहार की बात करें यह विशेष धर्म के लोगों द्वारा मनाया जाता है किन्तु सभी धर्म के लोग भी इस त्यौहार का आनंद लेते हैं। गणेश चतुर्थी भी उन्हीं धार्मिक त्योहारों में से एक है यह मुख्य रूप से महाराष्ट्र राज्य में बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता है। हिन्दुओं के महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक त्यौहार यह भी है। आज के इस लेख में हम आपको गणेश चतुर्थी पर निबंध बड़ी ही सरल भाषा में उपलब्ध करने जा रहे हैं, स्कूल या कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों के लिए यह लेख विशेष रूप से सहायक होगा। गणेश चतुर्थी पर निबंध (Ganesh Chaturthi Essay in Hindi) के लिए आर्टिकल को पूरा पढ़ें।

गणेश चतुर्थी पर निबंध हिंदी में | Ganesh Chaturthi Essay In Hindi
गणेश चतुर्थी पर निबंध हिंदी में | Ganesh Chaturthi Essay In Hindi

Ganesh Chaturthi Essay in Hindi (100 word)

प्रस्तावना- हिन्दुओं में सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक धार्मिक त्यौहार है गणेश चतुर्थी जो की विशेष रूप से महाराष्ट्र धूम-धाम से मनाया जाता है। हिन्दुओं के महत्वपूर्ण पर्वों में से एक पर्व गणेश चतुर्थी है पुरे भारत में विशेष रूप से उत्तरी भारत में इस पर्व को बड़े ही आनंदमयी रूप से मनाया जाता है।

गणेश जी की मूर्ति स्थापना – भगवान गणेश जी की पूजा से आरम्भ यह पर्व 11 दिनों तक चलता है, सभी अपने घरों या मंदिरों में भगवान गणेश जी की मूर्ति को स्थापित करते हैं, भक्तों द्वारा भगवान गणेश जी से प्रार्थना की जाती है, 11 दिन के इस पर्व में गणेश जी की मूर्ति को चतुर्थी के दिन स्थापित किया जाता है तथा अनन्त चतुर्दशी पर भगवान गणेश जी की मूर्ति को विसर्जित कर दिया जाता है भक्त गण श्री गणेश जी से अपने परिवार और अपने लिए प्रार्थना करते है, मोदक चढ़ाते हैं और बाप्पा मोरिया गेट हुए मन्त्रों का उच्चारण करते हैं तथा भगवान गणेश से अगले साल फिर से जल्द आने के लिए प्रार्थना करते हैं। इसे घर में या समुदाय या लोगों द्वारा समूह बनाकर, परिवार के साथ धूम-धाम से मनाया जाता है।

निष्कर्ष – गणेश चतुर्थी के पर्व में भक्तों द्वारा सुबह और संध्या के समय गणेश जी की आरती की जाती है और मोदक, लड्डू का प्रसाद चढ़ाया जाता है। महाराष्ट्र में इस उत्सव को बड़ी ही धूम-धाम से मनाया जाता है।

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गणेश चतुर्थी पर निबंध हिंदी में (200 शब्दों में )

प्रस्तावना– गणेश चतुर्थी मुख्य रूप से हिंदूओं का प्रमुख त्योहारों में से एक है, भारत के सभी राज्यों में बड़े ही उमंग के साथ गणेश जी की मूर्ति स्थापना के साथ इसे मनाया जाता है। किंतु महाराष्ट्र में बहुत ही धूमधाम से इस त्योहार को मनाया भगवान गणेश का यह पर्व जिसमें सर्वप्रथम पूजनीय गणेश जी की पूजा अर्चना की जाती है, पूरा भारत भक्ति भाव से उमंग के साथ बाप्पा मोरिया उद्घोष करते हुए गणेश जी की पूजा-अर्चना करते हैं।

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गणेश जी की कहानी – गणेश चतुर्थी के उत्सव मनाने के पीछे एक कथा है जिसके अनुसार एक बार भगवान गणेश जी का सर उनके पिता भगवान शिव ने क्रोधित होने से काट दिया गया था। भगवान शिव ने देवताओं की प्रार्थना और माँ पार्वती के कहने पर फिर से भगवान गणेश जी के धड़ को हाथी के सर से जोड़ दिया गया था। इस प्रकार से भगवान गणेश जी को हाथी का सर का लगाया गया उन्हें इस प्रकार नया जीवन दिया गया था। गणेश जी के इस नए जीवन के रूप में ही गणेश चतुर्थी को मनाया जाता है। इसी ख़ुशी में यह पर्व मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी हर साल अगस्त – सितंबर के महीने में आता है। बच्चों बूढ़ों तथा युवाओं द्वारा इस पर्व में बड़ी ही ऊर्जा के साथ गणेश जी की आरती की जाती है और नित्य किया जाता है। सभी अपने घरों में गणेश जी की मूर्ति को स्थापित करते हैं और 11 वे दिन मूर्ति को विसर्जित किया जाता है।

विघ्नहर्ता श्री गणेश –हिन्दू धर्म की मान्यता अनुसार गणेश जी घर पर आने से वे अपने साथ सुख, समृद्धि, बुद्धि को भी लाते हैं सभी विघ्नों को दूर करते हैं जैसे ही उनके विसर्जन का समय आता है तो वो हमारी बाधाओं और परेशानियों को भी अपने साथ ले जाते हैं, पंडालों में गणेश जी की पूजा आरती के लिए सजावट की जाती है, भगवान गणेश जी को उनके प्रिय मिष्ठान मोदक का प्रसाद चढ़ाया जाता है।

निष्कर्ष – गणेश चतुर्थी से की तैयारी के लिए बाजार सजाये जाते हैं मंदिरों की तथा घरों की साफ़ सफाई की जाती है और घर मंदिर को सुंदर फूलों से सजाया जाता है, हर तरफ गणेश जी की सुंदर-सुंदर आकर्षक मूर्तियां देखने को मिलती है यह पर्व 11 दिनों तक चलता है। विघ्नहर्ता श्री गणेश जी भक्तों के सारे विघ्न दूर करें ऐसी प्रार्थना गणेश जी से की जाती है।

Ganesh Chaturthi – गणेश चतुर्थी पर निबंध पर निबंध (300 शब्दों में)

प्रस्तवना– गणेश चतुर्थी हर साल मनाया जाता है, विघ्नहर्ता, लम्बोदर, गजानन आदि नामों से जानें, जाने वाले भगवान शिव और माँ पार्वती के पुत्र गणेश जी की पूजा और आरती को इस दिन किया जाता है भक्तों द्वारा मंदिरों और घरों को सजाया जाता है विशेष रूप से महाराष्ट्र में बड़े ही धूमधाम से गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। इस उत्सव को विनायक छवि या विनायक चतुर्थी भी कहा जाता है।

गणेश चतुर्थी क्यों मनाई जाती है – पुराणों के अनुसार यह माना जाता है की चतुर्थी वाले दिन प्रथम पूजनीय श्री गणेश जी का जन्म हुआ था। लोगों द्वारा इस दिन भगवान गणेश जी की बड़ी या छोटी मूर्तियों को अपने घर या मंदिरों में स्थापित किया जाता है और इनकी इस प्रतिमा की उपासना कही 7 या 9 दिनों तक की जाती है पुरे 10 दिन तक गणेश जी को घर में स्थापित किया जाता है और बड़े धूमधाम से गणेश जी की आरती पुरे परिवार के साथ की जाती है। माता पार्वती और भगवान शिव के पुत्र तथा रिद्धि-सिद्धि के पति भगवान गणेश जी बुद्धि और समृद्धि के भगवान है, लोग बुद्धि और समृद्धि के लिए भगवान से प्रार्थना करते हैं। महाराष्ट्र राज्य में गणेश चतुर्थी को सबसे पहले छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा मनाया गया था उन्होंने ही इसकी शुरुआत की थी। भक्तों द्वारा इस दिन सुख-समृद्धि और शांति की कामना भगवान गणेश जी से की जाती है।

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गणेश चतुर्थी की शुरुआत- गणेश चतुर्थी वाले दिन हिन्दू समुदाय के लोग सुबह जल्दी उठकर स्नान करके तथा नए कपडे पहनने के बाद अपने घरों के पूजा स्थान पर भगवान गणेश जी पूजा करते हैं मन्त्रों का उच्चारण, आरती करके माथे पर तिलक लगाकर भगवान को प्रसाद चढ़ाते हैं तथा सभी रीतियों को अपनाकर पूजा संपन्न करते हैं। सन्न 1983 में लोकमान्य गंगाधर तिलक जो की एक सामाजिक कार्यकर्ता, भारतीय राष्ट्रवादी नेता और एक स्वतंत्रता सेनानी के रूप में जाने जाते थे उन्होंने इस उत्सव की शुरुआत की थी। हिन्दू धर्म को अंग्रेजी शासन में पश्चिमी सभ्यता के शाये से बचाने के लिए उस समय गणेश पूजा की प्रथा को चलाया गया था ।

गणेश चतुर्थी का महत्व – भारत में वैसे तो हर राज्य में हिन्दुओं द्वारा इस पर्व को धूम-धाम से मनाया जाता है किन्तु महाराष्ट्र में गणेश पूजा का अधिक महत्व है, यहाँ गणेश चतुर्थी को बड़े पर्व के रूप में बड़े ही उत्साहपूर्ण तरीके से मनाया जाता है। और लोगों द्वारा बढ़-चढ़ कर इसमें भाग लिया जाता है। गणेश चतुर्थी को लगभग 10 दिनों के लिये अगस्त और सितंबर माह में मनाया जाता है, इसमें गणेश चतुर्थी के दौरान गणेश जी की मूर्ति स्थापना से लेकर गणेश मूर्ति के विसर्जन (गणेश विसर्जन) होता है, गणेश चतुर्थी से लेकर 10 दिनों के इस समय में भगवान गणेश जी की पूजा के कर उन्हें कपूर, लाल चन्दन, नारियल, गुड़, दुराव घास, लाल फूल, मोदक, को चढ़ाया जाता है, गणेश विसर्जन के समय लोगों द्वारा भगवन गणेश जी की मूर्ति को विदा किया जाता है और उनका विसर्जन नदी में किया जाता है और अगले साल फिर से बाप्पा मोरिया गणेश जी से जल्द से जल्द आने के लिए प्रार्थना की जाती है।

उपसंहार -गणेश चतुर्थी के दिन शिव पुत्र भगवान गणेश जी की मूर्ति को लोगों द्वारा अपने घर में स्थापित किया जाता है घर में आने वाली बाधाओं और परेशानियों को भगवान गणेश जी द्वारा हर लिया जाता है महाराष्ट्र राज्य के लोगों द्वारा विशेष रूप से इस त्यौहार को बड़े ही आनंदमयी रूप से हर साल मनाया जाता है तथा उनका यह पसंदीदा और प्रमुख त्यौहार है, बड़े से बड़े और छोटे से छोटे सभी आयु वर्ग के लोगों द्वारा यह मनाया जाता है।

Ganesh Chaturthi Essay in Hindi FAQ

गणेश चतुर्थी कब मनाई जाती है ?
गणेश चतुर्थी हर साल भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी (अगस्त- सितंबर) को मनाया जाता है।

गणेश जी को अन्य किस नाम से जाना जाता है ?
गणेश जी के अन्य नाम -सुमुख, एकदंत, कपिल, गजकर्ण, लंबोदर, विकट, विघ्नविनाशक आदि नाम से भी जाना जाता है।

गणेश जी की मूर्ति को कब विसर्जित किया जाता है ?
गणेश जी की 10 दिनों की पूजा के उपरान्त 11वें दिन विसर्जित कर दिया जाता है।

गणेश जी को प्रसाद में क्या चढ़ाया जाता है ?
प्रसाद के रूप में गणेश जी को मोदक, लड्डू चढ़ाये जाते हैं।

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