कारक: परिभाषा, भेद और उदाहरण (Karak in Hindi)

कारक (Karak) हिंदी व्याकरण में एक महत्वपूर्ण अवधारणा है। यह संज्ञा या सर्वनाम के क्रिया के साथ संबंध को दर्शाता है। दूसरे शब्दों में, कारक यह बताता है कि वाक्य में संज्ञा या सर्वनाम का क्या काम है।

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Reported by Rohit Kumar

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संज्ञा का जो रूप वाक्य से सम्बन्ध के रूप में प्रयोग किया जाता है उसे कारक कहा जाता है। वास्तव में कारक संज्ञा का वह स्वरूप होता है जो कि मुख्य कर्ता की ओर अपने सम्बन्ध का बोध करता है। हिन्दी व्याकरण में कारक के कई भेद हैं। इस लेख में हम आपको कारक की परिभाषा (Karak in Hindi) और कारक के भेद के बारे में उदाहरण सहित बताने जा रहे हैं। अधिक जानकारी के लिये लेख को अन्त तक अवश्य पढें।

कारक – Karak in Hindi, परिभाषा, भेद और उदाहरण : हिन्दी व्याकरण
Karak in Hindi, कारक की परिभाषा, भेद और उदाहरण : हिन्दी व्याकरण

यह भी देखें: वाक्य की परिभाषा, भेद और उदाहरण

कारक की परिभाषा (Karak in Hindi)

किसी क्रिया के वर्णन करने समय क्रिया के कारण, सम्बन्ध और अन्य रूपों में संज्ञा के जिन रूपों का प्रयोग किया जाता है उन्हें ही कारक कहा जाता है। जब किसी वाक्य में संज्ञा अथवा सर्वनाम के साथ जिन शब्दों का प्रयोग किया जाता है तो उन्हें कारक विभक्ति कहा जाता है। कारक की परिभाषा– वास्तव में कारक विभक्ति क्रिया या क्रिया पद से सम्बन्ध को दर्शित करता है। जैसे कि ने, को, से, के लिये आदि।

कारक के उदाहरण

राम ने श्याम को पुस्तक दी।
मोहन ने लेख लिखा।
पीटर ने अब्दुल को खाना दिया।
मनोहर ने अस्पताल में इलाज करवाया।

कारक के भेद

  • हिन्दी व्याकरण में कारक के आठ भेद या प्रकार हैं। ये हैं- कर्ता कारक, कर्म कारक, करण कारक, सम्प्रदान कारक, अपादान कारक, सम्बन्ध कारक, अधिकरण कारक और सम्बोधन कारक। व्याकरण के तौर पर यह सभी कारक संस्कृत भाषा के नियमों के अनुसार ही हिन्दी भाषा में प्रयुक्त किये जाते हैं। जबकि संस्कृत भाषा में 6 कारक होते हैं। सम्बन्ध और सम्बोधन कारक को संस्कृत भाषा व्याकरण में छोड़ दिया जाता है।

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कारक महत्वपूर्ण तथ्य

कारक चिन्ह अर्थ
कर्ता कारकनेकाम करने वाले का बोध होता हो
कर्म कारककोजिस पर काम के प्रभाव पडने का बोध होता हो
करण कारकसे, द्वाराक्रिया का कारण अर्थात जिसके द्वारा कर्ता काम करे
सम्प्रदान कारकको, के लियेजिसके लिये क्रिया की जाने का बोध होता हो
अपादान कारकसे अलग होनाअलग होना प्रकट करने के लिये
सम्बन्ध कारकका, की, के, ना, नी, ने, रा, री, रेवाक्य के अन्य पदों से सम्बन्ध का बोध होता हो
अधिकरण कारकमें, परक्रिया का आधार
सम्बोधन कारकहे! अरे! अजी!किसी को पुकारना अथवा बुलाना संबोधित करना

कर्ता कारक

जिस रूप से कार्य को करने वाले या क्रिया का बोध होता हो वह कर्ता कारक कहलाता है। कर्ता कारक को ने विभक्ति के द्वारा पहचाना और दर्शाया जाता है। कर्ता कारक के ने विभक्ति का प्रयोग वर्तमान काल और भविष्य काल में प्रयोग नहीं किया जाता है। इस प्रकार यह भूतकाल में प्रयोग किया जाता है। कर्ता कारक का प्रयोग सकर्मक धातुओं के साथ ही भूतकाल में किया जाता है। साधारण शब्दों में कहें तो किसी भी वाक्य में जिसके द्वारा कार्य किया जाता है उसे कर्ता कहा जाता है। कर्ता की पहचान का बोध कराने वाले कारक ही कर्ता कारक होते हैं। उदाहरण के तौर पर –

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राकेश ने सोहन को पीटा – इस वाक्य में पीटना क्रिया है जो कि भूतकाल में घटित हुयी है और इस क्रिया को राकेश के द्वारा किया जा रहा है। अतः इस वाक्य में कर्ता कारक राकेश है। इसके साथ ही ने कर्ता कारक का विभक्ति चिन्ह ने है जिसका कि राकेश के साथ प्रयोग किया गया है। वर्तमान काल में कर्ता कारक के साथ ने विभक्ति का प्रयोग नहीं किया जाता है। जैसे कि महिला खाना बनाती है- इस वाक्य में कर्ता तो महिला है लेकिन यह वाक्य वर्तमान काल में है और क्रिया वर्तमान काल में घटित होती है इसलिये कर्ता कारक की ने विभक्ति का प्रयोग नहीं किया गया है।

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कर्ता कारक की विशेषतायें

  • भूतकाल में अकर्मक क्रिया के कर्ता के साथ भी ने विभक्ति चिन्ह का प्रयोग नहीं किया जाता है। जैसे कि – वह रोया। यहां कर्ता के रोने की क्रिया भूतकाल में है लेकिन क्रिया अकर्मक है इसलिये ने विभक्ति का प्रयोग नहीं किया गया है।
  • इसी प्रकार भविष्यत काल और वर्तमान काल में सकर्मक क्रिया के साथ भी ने परसर्ग या विभक्ति का प्रयोग नहीं किया जाता है। उदाहरण के लिये वह पानी पीता है, नरेश पानी पियेगा आदि।
  • कर्ता कारक में कभी के स्थान पर को तथा से परसर्ग का भी प्रयोग किया जाता है। जैसे कि – श्रीमान को चले जाना चाहिये, अरविंद से पुस्तक नहीं पढी गयी, उससे बॉक्स नहीं उठाया गया आदि।

कर्ता का प्रयोग

दो प्रकार से कर्ता कारक का प्रयोग किया जाता है। परसर्ग सहित प्रयोग और परसर्ग रहित प्रयोग। उदाहरण के तौर पर-

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  • परसर्ग सहित कर्ता कारक का प्रयोग- भूतकाल में घटित सकर्मक क्रिया में कर्ता कारक के साथ ने परसर्ग का प्रयोग किया जाता है। जैसे कि पंकज ने फोन किया, राम ने उत्तर दिया, उसने नहीं देखा आदि।
    • भूतकाल में प्रेरणादायक क्रियाओं के साथ भी कर्ता कारक की ने विभक्ति का प्रयोग किया जाता है। जैसे कि मैंने पैसे दिये, मैंने उसे बताया आदि।
    • जब भूतकाल में कोई संयुक्त क्रिया होती है और क्रिया के दोनों ही खण्ड सकर्मक होते हैं तो कर्ता के आगे ही ने विभक्ति का प्रयोग किया जाता है। जैसे कि अब्दुल ने टायर बदल दिया, जहांगीर ने पत्थर फेंक दिया आदि।
  • परसर्ग रहित कर्ता कारक का प्रयोग – यदि भूतकाल में कोई अकर्मक क्रिया घटित होती है तो कर्ता कारक की ने विभक्ति का प्रयोग नहीं किया जाता है। जैसे कि आयुष गिरा, सलमान गया, सलीम गिरा आदि।
    • वर्तमान काल और भूतकाल में परसर्ग या विभक्ति का प्रयोग नहीं किया जाता है। जैसे कि राम आता है, श्याम जाता है, तुलसी खाता है, नरेन्द्र रोता है, धोबी धोता है आदि।
    • जिन वाक्यों में लगना, सकना, जाना, चूकना आदि का प्रयोग होता है वहां पर भी ने परसर्ग का प्रयोग नहीं किया जाता है।
    • इसके अतिरिक्त कर्ता की विधि और संभाव्य क्रिया में को परसर्ग का भी प्रयोग किया जाता है। जैसे कि शाहीन को कैच पकड लेना चाहिये।

कर्म कारक

क्रिया के द्वारा घटित कर्म के प्रभाव का जहां पर बोध होता है उसे कर्म कारक कहा जाता है। कर्म कारक का विभक्ति चिन्ह को है। कर्म कारक का प्रयोग कर्म संज्ञा के साथ अधिकांशतः होता है। इसके साथ ही जब किसी विशेषण का प्रयोग संज्ञा के तौर पर किया जाता है तो भी कर्म कारक की विभक्ति का प्रयोग किया जाता है।

उदाहरण के तौर पर राम ने रावण को मारा – इस वाक्य में मारने की क्रिया का प्रभाव रावण पर पडा है इसलिये रावण यहां कर्म कारक है। इसलिये यहां कर्म कारक अर्थात रावण के साथ को परसर्ग लगा हुआ है। एक अन्य उदाहरण है नरेन्द्र ने पत्र लिखा – यहां नरेन्द्र के द्वारा लिखने की क्रिया का प्रभाव पत्र पर हो रहा है इसलिये इस वाक्य में पत्र कर्म कारक है लेकिन यहां कर्म कारक पत्र के साथ को विभक्ति चिन्ह का प्रयोग नहीं हुआ है।

कर्म कारक के उदाहरण

  • सीता फल खाती है।
  • सोनिया गिटार बजा रही है।
  • राहुल खाना खा रहा है।
  • माता बच्चे को सुला रही है।
  • रोहित मोहित को बुला रहा है।
  • प्रिंसिपल को बुलाओ।
  • पत्थर को गिराओ।
  • उसने पत्र लिखा।
  • राहुल संजीव को गीत सुना रहा है।

करण कारक

किसी क्रिया के घटित होने में जो सहायता का साधन अथवा कारण हो उसे करण कारक कहते हैं। दूसरे शब्दों में जिस कारक से क्रिया के सहायक होने का बोध होता हो वह करण कारक कहलाता है। करण कारक का विभक्ति चिन्ह अथवा परसर्ग से है। उदाहरण स्वरूप –

  • राम ने श्याम को डंडे से पीट दिया।
  • राम चाकू से सब्जी काट रहा है।

उपरोक्त वाक्यों में पहले वाक्य में राम के द्वारा श्याम को पीटने की क्रिया डंडे की सहायता से किया गया है दूसरे शब्दों में डंडा पीटने की क्रिया में सहायक है। अतः पहले वाक्य में डंडे से करण कारक है। वहीं दूसरे वाक्य में सब्जी को काटने की क्रिया में चाकू सहायक है इसलिये दूसरे वाक्य में चाकू से करण कारक है।

करण कारक के उदाहरण

  • मैं दोपहिया वाहन से कार्यालय आता हूं।
  • वह वेशभूषा से संदिग्ध प्रतीत होता है।
  • नगमा सुरेश के साथ मंदिर गयी।
  • मुकेश एक पैर से लंगडा है।
  • केशव सिर से गंजा है।
  • भिखारी ठंड से कांप रहा था।
  • बच्चे गाड़ियों से खेल रहे हैं।
  • राम ने रावण को बाण से मारा।
  • पत्र को कलम से लिखा गया है।
  • आतंकियों ने गोलियों से कई लोगों की हत्या कर दी।

संप्रदान कारक

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शाब्दिक अर्थ के तौर पर संप्रदान से आशय देना होता है। इस प्रकार क्रिया के कर्ता के द्वारा जिसके लिये क्रिया की गयी है अथवा संप्रदान को व्यक्त करने वाले कारक रूप को संप्रदान कारक कहा जाता है। इस प्रकार प्राप्त करने वाले को संप्रदान कारक कहा जाता है। संप्रदान कारक के लिये विभक्ति चिन्ह के लिये अथवा को का प्रयोग किया जाता है। उदाहरण स्वरूप –

  • भीम के लिये खाना लाओ।
  • दुकानदार को पैसे दो।

यहां पहले वाक्य में खाना लाने की क्रिया हो रही है और भीम के लिये क्रिया की जा रही है। इसलिये भीम के लिये यहां संप्रदान कारक है। वहीं दूसरे वाक्य में पैसे देने की क्रिया में दुकानदार को संप्रदान कारक है।

संप्रदान कारक के उदाहरण

  • गरीबों को दान देना चाहिये।
  • बडों को मान देना चाहिये।
  • शिक्षकों को सम्मान देना चहिये।
  • रामनाथ अपने पुत्र के लिये वस्त्र लाया।
  • शकील हिमानी को पुस्तक देता है।
  • मैं दोस्तों के लिये खाना बना रहा हूं।
  • मेरे लिये पानी लेकर आओ।

अपादान कारक

क्रिया के घटित होते हुये प्रयुक्त संज्ञा के जिस रूप से एक वस्तु का दूसरी वस्तु से अलग होने का बोध होता हो उसे अपादान कारक कहा जाता है। अपादान कारक का विभक्ति चिन्ह से है। उदाहरण के लिये –

  • नरेन्द्र घोडे से गिर पडा।
  • राम कार्यालय से चला गया।

पहले वाक्य में नरेन्द्र के घोडे से गिरने की क्रिया में नरेन्द्र का घोडे से अलग होने का बोध हो रहा है। इसलिये घोडे से यहां अपादान कारक है। वहीं दूसरे वाक्य में राम के जाने की क्रिया से राम का कार्यालय से अलग होने का बोध हो रहा है इसलिये दूसरे वाक्य में कार्यालय से अपादान कारक है।

संबंध कारक

कारक के जिस रूप से एक वस्तु का दूसरी वस्तु से सम्बन्ध प्रकट होता हो संबंध कारक कहलाता है। सम्बन्ध कारक में का, के, की, रा, री और रे विभक्ति चिन्हों का प्रयोग किया जाता है। यह विभक्तियां संज्ञा, लिंग और वचन के अनुसार प्रयोग होती है और बदलती रहती हैं। उदाहरण स्वरूप –

  • वह रामलाल का बेटा है।
  • यह मुकेश की गाडी है।

उपरोक्त पहले वाक्य में रामलाल का बेटे से और मुकेश का गाडी से सीधा सम्बन्ध प्रकट हो रहा है। इसलिये उपरोक्त दोनों वाक्यों में सम्बन्ध कारक है। संज्ञा लिंग और वचन के अनुसार करण कारक इस प्रकार से बदलते हैं-बडे घर की बेटी, श्यामलाल का बेटा, सुनीता के पति, डायना के पोते, मेरा बच्चा, मेरी बच्ची, हमारे बच्चे इत्यादि।

अधिकरण कारक

घटित होने वाली क्रिया के आधार का बोध कराने वाले कारक को अधिकरण कारक कहा जाता है। विभक्ति चिन्ह के तौर पर अधिकरण कारक में और पर का उपयोग करता है। वस्तुस्थिति के बोध के तौर पर कभी कभी भीतर, अंदर, उपर, नीचे, किनारे, बीच, यहां, वहां का भी प्रयोग किया जाता है। उदाहरण स्वरूप-

  • रेल पटरी पर दौड रही है।
  • कार्यालय में वातानुकूलित सिस्टम लगा है।

उपरोक्त वाक्यों में पटरी पर रेल के दौड लगाने का आधार है और वातानुकूलित सिस्टम का आधार कार्यालय में है। इस प्रकार दोनों वाक्यों में अधिकरण कारक का प्रयोग किया गया है।

अधिकरण कारक के उदाहरण

  • महेश विद्यालय में है।
  • पुस्तक मेज पर है।
  • जंगल में शेर रहता है।
  • जेब में पैसे रखे हैं।
  • घर के अंदर क्या है।
  • मंदिर में घंटी बज रही है।
  • गंगा किनारे शव जलाये जाते हैं।
  • ऐवरेस्ट नेपाल में है।
  • कुर्सी कमरे के बीच में लगा दो।

संबोधन कारक

जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि किसी वस्तु के सम्बोधन अथवा सचेत करने या बुलाने का भाव जिससे प्रकट हो रहा हो उसे संबोधन कारक कहा जाता है। संबोधन कारक वाक्यों में सामान्यत विस्मयादिबोधक चिन्ह लगाया जाता है। जैसे कि-

  • हे नाथ! हे मेरे नाथ! मैं आपको भूलूं नहीं।
  • अरे! यह क्या हो गया है।
  • शम्भूनाथ! जरा यहां आओ।

कारक से सम्बन्धित प्रश्न- FAQ

कारक की परिभाषा क्या है?

किसी क्रिया के वर्णन करने समय क्रिया के कारण, सम्बन्ध और अन्य रूपों में संज्ञा के जिन रूपों का प्रयोग किया जाता है उन्हें ही कारक कहा जाता है। जब किसी वाक्य में संज्ञा अथवा सर्वनाम के साथ जिन शब्दों का प्रयोग किया जाता है तो उन्हें कारक विभक्ति कहा जाता है।

कारक के कितने भेद होते हैं?

हिन्दी व्याकरण में कारक के आठ भेद होते हैं।

कारक के भेद कौन से हैं?

हिन्दी व्याकरण में कारक के आठ भेद इस प्रकार हैं – कर्ता कारक, कर्म कारक, करण कारक, सम्प्रदान कारक, अपादान कारक, सम्बन्ध कारक, अधिकरण कारक और सम्बोधन कारक।

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