परमाणु क्या है, संरचना व खोज – What Is Atom in Hindi

हम जानते हैं कि प्रत्येक पदार्थ छोटे छोटे और सूक्ष्म अणुओं से बनता है। और अणुओं का संघटन करने पर और सूक्ष्म कण हमें प्राप्त होते है जिन्हे परमाणु कहा जाता है। आज हम आपको परमाणु क्या है, इनकी संरचना क्या है और किस प्रकार से परमाणु की खोज की गयी। सभी तथ्य विस्तार से ... Read more

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Reported by Rohit Kumar

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हम जानते हैं कि प्रत्येक पदार्थ छोटे छोटे और सूक्ष्म अणुओं से बनता है। और अणुओं का संघटन करने पर और सूक्ष्म कण हमें प्राप्त होते है जिन्हे परमाणु कहा जाता है। आज हम आपको परमाणु क्या है, इनकी संरचना क्या है और किस प्रकार से परमाणु की खोज की गयी। सभी तथ्य विस्तार से बताने जा रहे हैं। परमाणु के बारे में विस्तृत जानकारी के लिये इस लेख को पूरा अवश्य पढें।

परमाणु क्या है, संरचना व खोज What Is Atom In Hindi
परमाणु क्या है, संरचना व खोज What Is Atom In Hindi

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परमाणु क्या है? (What Is Atom)

किसी भी तत्व अथवा पदार्थ की वह इकाई है, जो कि स्वतंत्र अवस्था में नहीं पायी जाती है परमाणु कहलाती है। यही सूक्ष्म परमाणु पदार्थ की किसी भी अभिक्रिया में भाग लेते हैं। 1803 में वैज्ञानिक जॉन डॉल्टन ने आधिकारिक तौर पर परमाणु का पहला सिद्वांत दिया था। डॉल्टन के अनुसार परमाणु को विभाजित नहीं किया जा सकता था। कई वर्षों तक परमाणु को एक अविभाजित कण माना गया।

लेकिन 19 वीं सदी के अन्त तक आते आते वैज्ञानिक कई ऐसे प्रयोग कर चुके थे जिससे कि यह प्रमाणित हो गया कि परमाणु अविभाज्य नहीं है। समय के साथ साथ हो रहे प्रयोगों के आधार पर परमाणु की व्याख्या भी बदलती चली गयी। वास्तव में परमाणु किसी पदार्थ का वह सूक्ष्मतम कण है जो कि पदार्थ के सभी गुणों को प्रदर्शित करते हुये रासायनिक अभिक्रियाओं में भाग लेता है। किन्तु स्वतंत्र अवस्था में नहीं पाया जाता है।

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परमाणु की खोज और परमाणु संरचना

परमाणु का सर्वप्रथम उल्लेख भारतीय और ग्रीक दार्शनिकों के हवाले से मिलता है। परमाणु की यह परिकल्पना सर्वप्रथम महर्षि कणाद के द्वारा प्रस्तावित की गयी थी। उनका कहना था कि प्रत्येक वस्तु एक कभी न विभाजित होने वाले अणु से बनी है। कणाद ने इसे परम अणु अर्थात परमाणु नाम दिया। ठीक इसी कालखण्ड में ग्रीस दार्शनिकों के द्वारा भी परिकल्पना प्रस्तुत की गयी इसमें उन्होंने परमाणु को एटमस अर्थात कभी न कटने वाला तत्व नाम दिया। हालांकि यह सभी परिकल्पनायें मात्र दार्शनिक थीं और दर्शनशास्त्र के हवाले से लिखी गयी थी। इन परिकल्पनाओं का कोई प्रामाणिक साक्ष्य मौजूद नहीं था और परमाणु क्या है इसकी तथ्यात्मक पुष्टि इनके द्वारा नहीं की गयी।

डाल्टन का परमाणु सिद्वान्त

आधुनिक इतिहास में परमाणु का पहला प्रमाणिक प्रयोग करने का श्रेय इंग्लैंड के एक अंग्रेज रसायनज्ञ और वैज्ञानिक जॉन डाल्टन को जाता है। एक शिक्षक के तौर पर अपनी आजीविका की शुरूआत करने वाले डाल्टन को एक भौतिकविद्, रसाायन शास्त्री और मौसम विज्ञानी के रूप में भी जाना जाता है। इन्होंने वर्णान्धता (Color Blindness) के सम्बन्ध में बहुत से सफल प्रयोग किये इसलिये वर्णान्धता (Color Blindness) को Daltonism भी कहा जाता है। बहरहाल, वर्ष 1803 ई में डाल्टन के द्वारा अपने परमाणु सिद्वांत को प्रस्तुत किया गया। जो कि अपनी तरह का एक पहला प्रमाणिक और महत्वपूर्ण सिद्वान्त था।

डाल्टन ने अपने परमाणु सिद्वांत में परमाणु को पदार्थ का मूल कण कहा और परमाणु को पूरी तरह से अविभाज्य माना। डाल्टन के परमाणु सिद्वांत की मुख्य परिकल्पनायें निम्नलिखित हैं –

  • डाल्टन के परमाणु सिद्वांत के अनुसार सभी पदार्थ परमाणुओं से मिलकर ही बने होते हैं।
  • परमाणु पदार्थ के सूक्ष्मतम कण होते हैं।
  • परमाणु पदार्थ का के मूल कण हैं। परमाणु को न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है।
  • किसी एक तत्व के सभी परमाणु भौतिक और रासायनिक गुण धर्मों में समान होते हैं।
  • अलग अलग तत्वों के परमाणुओं के भौतिक और रासायनिक गुणधर्म अलग अलग होते हैं।
  • किसी यौगिक के निर्माण के लिये अलग अलग तत्वों के परमाणु पूर्ण संख्या या पूर्ण संख्या के अनुपात में संयुक्त होकर यौगिक का निर्माण करते हैं।
  • किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में परमाणु या तो जुडते हैं, अलग होते हैं अथवा पुर्नव्यवस्थित होते हैं।
What Is Atom In Hindi
Different Atomic Models

परमाणु के मूल अथवा मौलिक कण

डाल्टन के परमाणु सिद्वांत के आने के बार लगभग एक सदी तक इसी सिद्वांत का अनुसरण किया जाने लगा। किन्तु 19 वीं सदी के अन्त और 20 वी सदी के आरम्भ में कुछ वैज्ञानिकों के द्वारा किये गये प्रयोगों से यह स्पष्ट हो गया कि परमाणु पदार्थ मूल कण नहीं है। बल्कि परमाणु को भी विभाजित किया जा सकता है। इन वैज्ञानिकों में सर जोसेफ जॉन थॉमसन, ऐ. रदरफोर्ड, जेम्स चैडविक, नील्स बोर आदि प्रमुख थे।

इलेक्ट्रॉन की खोज

वर्ष 1897 में सर जोसेफ जॉन थॉमसन के द्वारा इलेक्ट्रॉन की खोज की गयी। इसी खोज के साथ जॉन डाल्टन के परमाणु सिद्वान्त को खारिज करते हुये थॉमसन ने अपने प्रयोगों के आधार पर एक नया परमाणु सिद्वांत प्रस्तुत किया। जिसे थॉमसन का परमाणु सिद्वांत कहा जाता है।इलेक्ट्रॉन परमाणु के आकार से भी अत्यधिक सूक्ष्म कण हैं। यह परमाणु के नाभिक के चारों और चक्कर काटते रहते हैं। अपने प्रयोग में थॉमसन ने पाया कि इलेक्ट्रॉन मूलतः एक ऋण आवेशित कण है। एक इलेक्ट्रॉन पर 1.6 × 10−19 कूलॉम ऋण आवेश होता है।

इलेक्ट्रॉन के गुण और विशेषतायें

  • वर्ष 1897 ई में वैज्ञानिक सर जोसेफ जॉन थॉमसन के द्वारा कैथोड किरणों के प्रयोग में इलेक्ट्रॉन की खोज की गयी।
  • इलेक्ट्रॉन परमाणु के मूल अथवा मौलिक कणों में से एक है।
  • इलेक्ट्रॉन एक ऋणावेशित कण है।
  • एक इलेक्ट्रॉन पर 1.6 × 10−19  कूलॉम ऋण आवेश होता है।
  • एक इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान लगभग 9.1093837 × 10-31 किलोग्राम होता है।
  • एक इलेक्ट्रॉन की मानक त्रिज्या 2.81 × 10-15 मीटर  लगभग है

प्रोटॉन की खोज

परमाणु के अन्दर धन आवेश विद्यमान होने की पुष्टि के बाद न्यूजीलैंड के वैज्ञानिक अर्नेस्ट रदरफोर्ड के द्वारा अपने सोने की पन्नी और हाईड्रोजन नाभिक या एल्फा कणों के प्रयोग के द्वारा परमाणु के नाभिक में धनावेशित प्रोटॉन की खोज की गयी। अपने इन प्रयोगों के आधार पर रदरफोर्ड के द्वारा परममाणु और उसके नाभिक के सम्बन्ध में व्याख्या की गयी। जिसे रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल के नाम से जाना जाता है। इस मॉडल के मुख्य तथ्य थे-

  • वर्ष 1920 में सर्वप्रथम प्रोटॉन शब्द का प्रयोग किया गया।
  • यह कि परमाणु के भीतर एक निश्चित मात्रा में धन आवेश पाया जाता है।
  • यह धनावेश बेहद ही सूक्ष्म स्थान पर केन्द्रित रहता है। इसे रदरफोर्ड के द्वारा नाभिक नाम दिया गया।
  • क्योंकि परमाणु उदासीन होता है। इससे यह पुष्टि हुयी कि नाभिक में पाया जाने वाला धन आवेश परमाणु में पाये जाने वाले ऋण आवेश के बराबर होता है।

प्रोटॉन के गुण और विशेषतायें

  • प्रोटॉन परमाणु के मूल अथवा मौलिक कणों में से एक है।
  • एक प्रोटॉन पर एक इलेक्ट्रॉन के बराबर तथा विपरीत आवेश होता है।
  • प्रोटॉन एक धन आवेशित कण है।
  • एक प्रोटॉन पर 1.6 × 10−19  कूलॉम धन आवेश होता है।
  • एक प्रोटॉन का द्रव्यमान लगभग 1.67262192 × 10-27 किलोग्राम होता है।
  • एक प्रोटॉन की मानक त्रिज्या  लगभग 10-13 सेमी  लगभग होती है

न्यूट्रॉन की खोज

अपने प्रयोगों और अनुसंधान के आधार पर ब्रिटिश वैज्ञानिक जेम्स चैडविक के द्वारा वर्ष 1932 ई में महत्वपूर्ण न्यूट्रॉन की खोज की गयी। अपने प्रयोगों के द्वारा चैडविक ने व्याख्या की कि न्यूट्रॉन एक आवेश रहित कण हैं। अर्थात न्यूट्रॅान्स पर कोई आवेश नहीं होता है और यह परमाणु के नाभिक में प्रोट्रॉन के साथ मौजूद रहते हैं। उनकी इस खोज के लिये चैडविक को वर्ष 1935 ई में प्रतिष्ठित नोबेल पुररूस्कार से सम्मानित किया गया।

न्यूट्रॉन के गुण और विशेषतायें

  • परमाणु के नाभिक में उपस्थित होने पर भी न्यूट्रॉन को परमाणु का मूल कण नहीं माना जाता है। क्योंकि न्यूट्रॉन को भी अप क्वार्क और डाउन क्वार्क में विभाजित किया जा सकता है।
  • जैसा कि नाम से स्पष्ट है कि न्यूट्रॉन पर किसी भी प्रकार का आवेश नहीं पाया जाता है और यह उदासीन होता है।
  • न्यूट्रॉन परमाणु के नाभिक में प्रोटॉन के साथ उपस्थित होता है।
  • एक न्यूट्रॉन का द्रव्यमान लगभग 1.67493 × 10−27 किलोग्राम होता है। जो कि एक प्रोटॉन के द्रव्यमान के लगभग बराबर है।
  • एक मुक्त न्यूट्रॉन किसी रेडियोएक्टिव तत्व की भांति व्यवहार करता है।
  • रेडियोएक्टिवता और परमाणु बमों के निर्माण और संचालन के क्षेत्र में न्यूट्रॉन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

परमाणु क्या है-परमाणु की वर्तमान अवधारणा

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वैज्ञानिकों के द्वारा किये जा रही खोजों और अनुसंधान के विकास के क्रम में परमाणु की व्याख्यायें भी बदलती रही हैं। वर्तमान में भी परमाणु और इसके मूल तत्वों पर शोध जारी है। इसलिये कालान्तर और वर्तमान में हुये प्रयोगों के आधार पर परमाणु पदार्थ का एक बहुत ही सूक्ष्मतम कण है।

जो कि इससे भी सूक्ष्म अन्य मूल अवयवों में विभाजित किया जा सकता है। तथा जो कि स्वतंत्र रूप मेें रासायनिक अभिक्रियाओं में भाग तो लेता है किन्तु स्वयं स्वतंत्र रूप से स्थायी नहीं होता है। परमाणु के नाभिक में धन आवेशित कण प्रोटॉन और उदासीन कण न्यूट्रॉन उपस्थित होते हैं। जबकि ऋण आवेशित कण इलेक्ट्रॉन इस नाभिक के चारों ओर वृत्ताकार कक्षाओं में चक्कर लगाते हैं।

Atom क्या है, संरचना व खोज से सम्बन्धित प्रश्न

परमाणु क्या है?

परमाणु पदार्थ का एक बहुत ही सूक्ष्मतम कण है जो कि इससे भी सूक्ष्म अन्य मूल अवयवों में विभाजित किया जा सकता है। तथा जो कि स्वतंत्र रूप मेें रासायनिक अभिक्रियाओं में भाग तो लेता है किन्तु स्वयं स्वतंत्र रूप से स्थायी नहीं होता है।

परमाणु के मूल कण कौन से हैं?

इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन को परमाणु का मूल कण माना जाता है। इन्हीं तीन सूक्ष्म कणों से एक परमाणु बनता है। प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन परमाणु के नाभिक में तथा इलेक्ट्रॉन इस नाभिक के चारों ओर वृत्तीय कक्षा में घूमते हैं।

इलेक्ट्रॉन की खोज किसने की?

वर्ष 1897 में सर जोसेफ जॉन थॉमसन के द्वारा इलेक्ट्रॉन की खोज की गयी। इलेक्ट्रॉन परमाणु के आकार से भी अत्यधिक सूक्ष्म कण हैं। यह परमाणु के नाभिक के चारों और चक्कर काटते रहते हैं। इलेक्ट्रॉन मूलतः एक ऋण आवेशित कण है एक इलेक्ट्रॉन पर 1.6 × 10−19 कूलॉम ऋण आवेश होता है।

प्रोटॉन की खोज किसने की?

न्यूजीलैंड के वैज्ञानिक अर्नेस्ट रदरफोर्ड के द्वारा परमाणु के नाभिक में धनावेशित प्रोटॉन की खोज की गयी।

न्यूट्रॉन की खोज किसने की?

ब्रिटिश वैज्ञानिक जेम्स चैडविक के द्वारा वर्ष 1932 ई में न्यूट्रॉन की खोज की गयी।

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