Surrogacy – सरोगेसी क्या है और सरोगेट मदर कौन होती है ?

Surrogacy : समय के साथ साथ विज्ञान ने भी बहुत तरक्की कर ली है। आज के समय में बहुत सी ऐसी समस्या हैं जिन्हे विज्ञान के मदद से अब सुलझा लिया गया है। और इसीलिए माना जाता है कि विज्ञान की मदद से मनुष्य बहुत कुछ कर सकता है। विज्ञान की नयी खोजों से बहुत ... Read more

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Reported by Rohit Kumar

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Surrogacy : समय के साथ साथ विज्ञान ने भी बहुत तरक्की कर ली है। आज के समय में बहुत सी ऐसी समस्या हैं जिन्हे विज्ञान के मदद से अब सुलझा लिया गया है। और इसीलिए माना जाता है कि विज्ञान की मदद से मनुष्य बहुत कुछ कर सकता है। विज्ञान की नयी खोजों से बहुत सी नयी तकनीकों का जन्म हुआ है। इन्ही तकनीकों में से एक है – आईवीएफ या सरोगेसी। आप ने भी इस बारे में अवश्य ही सुना होगा और इससे संबंधित बहुत सी न्यूज़ भी देखी होंगी। तो हम आप को आज इसी बारे में अपने लेख के माध्यम से जानकारी देंगे। विस्तार से जानने के लिए आप इस लेख को पूरा अवश्य पढ़ें।

यहाँ जानिए surrogacy क्या है और सरोगेट मदर कौन होती है
Surrogacy – सरोगेसी क्या है और सरोगेट मदर कौन होती है ?

क्या होती है सरोगेसी ?

ऐसे बहुत से दंपत्ति होते हैं जो किन्ही कारणों से माता पिता बनने में सक्षम नहीं होते और इस वजह से उनकी जिंदगी अधूरी सी रहती है। इसी समस्या से निजात पाने के लिए आज के समय में सरोगेसी और आईवीएफ जैसी तकनीक को इजात किया गया है। इस तकनीक की सहायता से अब सभी इच्छुक निःसंतान दंपत्ति, अपनी संतान को जन्म दे सकते हैं।

दूसरे शब्दों में कहें तो सरोगेसी एक प्रक्रिया है जिसके माधयम से निःसंतान दंपत्ति या जो बच्चे को स्वयं जन्म नहीं देना चाहते, वो किसी अन्य महिला के गर्भ के जरिये अपनी संतान को जन्म दे सकते हैं। इस तकनीक को आम भाषा में किराए की कोख़ भी कहते हैं, जिसके जरिये बहुत सी दंपत्ति अपने बच्चे को जन्म देते हैं। सरोगेसी की प्रक्रिया में एक एग्रीमेंट होता है जो इच्छुक पति पत्नी (या सिंगल पैरेंट) और उस महिला के बीच में होता है जो उनके बच्चे को अपने गर्भ में पालने को तैयार होती है। उस महिला को सरोगेट मदर कहते हैं।

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सरोगसी के जरिये माँ कैसे बनते हैं ?

सरोगेसी उन महिलाओं के लिए काफी लाभकारी है जो महिलाये विभिन्न कारणों के चलते माँ नहीं बन पाती। जैसे कि – प्रजनन संबंधी मुद्दों, गर्भपात या जोखिम भरे गर्भावस्था के कारण माँ बनने में सक्षम नहीं होना आदि। ऐसे में इन परेशानियों से जूझ रहे दम्पतियों के लिए ये किसी वरदान से कम नहीं हैं। इसमें दंपत्ति किसी अन्य महिला जो उनके बच्चे को अपने गर्भ में पालने के लिए तैयार हो यानी उनके लिए सरोगेट मदर बनने के लिए तैयार हो, के जरिये माता पिता बन सकते हैं। इस के लिए सरोगेट मदर बनने वाली महिला अपने या फिर डोनर के एग्स के जरिए किसी दूसरे कपल के लिए गर्भवती होती है।

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सरोगेसी प्रक्रिया में सरोगेट मदर और संबंधित दंप्पत्ति के बीच एक एग्रीमेंट साइन किया जाता है। जिस में बच्चे के जन्म तक के सभी संबंधित शर्तें व अन्य बातें लिखे होते हैं। इस प्रक्रिया के तहत होने वाले बच्चे पर सरोगेट मदर का कोई हक़ नहीं होता। बच्चे के कानूनन माता पिता सरोगेसी करवाने वाले माँ बाप ही होते हैं। और सरोगेट मदर को गर्भवस्था के दौरान मेडिकल जरुरतो और अपना ख्याल रखने के लिए अन्य आवश्यक जरूरतों की पूर्ती हेतु सरोगेसी करवाने वाले माता पिता द्वारा खर्च प्रदान किया जाता है। साथ ही बच्चे के जन्म के समय निर्धारित धनराशि का भुगतान भी कर दिया जाता है।

सरोगेसी के प्रकार

अभी तक लेख में आप ने जाना कि सरोगेसी क्या होती है ? आइये अब जानते हैं कि सरोगेसी कितने तरह की होती है ? आप को बताते चलें कि सरोगेसी मुख्य रूप से दो तरह की होती है। जिनमें से –

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  • पहली होती है ट्रेडिशनल सरोगसी (Traditional Surrogacy)
  • और दूसरी होती है जेस्टेशनल सरोगेसी (Gestational Surrogacy) .

ट्रेडिशनल सरोगसी (Traditional Surrogacy): इस प्रकार की सरोगेसी में होने वाले पिता या फिर डोनर के स्पर्म को सरोगेट मदर के एग्स से मैच कराया जाता है। ट्रेडिशनल सरोगसी (Traditional Surrogacy) में सरोगेट माता ही होने वाले बच्चे की बायोलॉजिकल मदर होती है। यानी जेनेटिकली बच्चा अपनी सरोगेट माँ से जुड़ा हुआ होता है।

जेस्टेशनल सरोगेसी (Gestational Surrogacy): इस प्रकार की सरोगेसी में सरोगेट माँ का होने वाले बच्चे से कोई जेनेटिक संबंध नहीं होता है। ऐसा इसलिए क्यूंकि जेस्टेशनल सरोगेसी में सरोगेट मदर के एग्स का उपयोग नहीं किया जाता। बल्कि इस केस में होने वाले माता पिता का स्पर्म और एग्स का टेस्ट ट्यूब बेबी (ivf तकनीक) के जरिये मैच कराया जाता है। इसके बाद इसे सरोगेट माँ के यूट्रस में इम्प्लांट कर दिया जाता है।

जेस्टेशनल सरोगेसी भी दो प्रकार की होती है।

  • अल्ट्रस्ट्रिक सरोगेसी: इस सरोगेसी में दंपत्ति उनके बच्चे को जन्म देने वाली सरोगेट माँ को अपने साथ रखने के लिए तैयार होते हैं और साथ ही गर्भवस्था के दौरान उसके देख रेख में होने वाले सभी खर्चों को वहन करते हैं। इस केस में सरोगेट महिला संबंधित दम्पति की परिचित या अपरिचित भी हो सकती है। हालाँकि आप की जानकारी हेतु बता दें कि अब नए नियमों के अनुसार अल्ट्रस्ट्रिक सरोगेसी में सरोगेट मदर सिर्फ कपल की परिचित होनी चाहिए जो उसके साथ रह सके।
  • कामर्शियल सरोगेसी : इस प्रकार की सरोगेसी में संबंधित दम्पति सरोगेट मदर को अपने साथ नहीं रखते हैं लेकिन उसकी देख रेख देख रेख और उसका ख्याल रखने के लिए पूरा खर्चा देते हैं। हालाँकि अब नए नियमों के अनुसार अब इस प्रकार की सरोगेसी पर बैन लगाया जा चुका है। जानकारी के लिए बता दें कि पहले भारत में कमर्शियल सरोगेसी काफी चलन में थी जिसमें कुल खर्च 15 से 30 लाख रूपए तक का खर्चा आता था।

जानिए सरोगेसी के नए नियम

  • सरोगेट मदर बनने महिला की उम्र 25 से 35 साल के बीच होनी चाहिए।
  • सरोगेट महिला शादीशुदा होनी चाहिए और उसका स्वयं का कोई बच्चा भी हो।
  • सरोगेसी का विकल्प चुनने वाले दम्पति को सरोगेट के रूप में अपने ही परिवार की किसी महिला का चुनाव करना होगा।
  • Altruistic Surrogacy के तहत सरोगेट के मेडिकल एक्सपेंस और इंश्योरेंस कवर को छोड़कर इच्छुक माता-पिता द्वारा कोई अन्य शुल्क या खर्च का वहन करना आवश्यक नहीं है।
  • सरोगेट के रूप में कोई भी पात्र महिला सिर्फ एक बार ही माँ बन सकती है। पहले ये 3 बार किया जा सकता था।

Surrogacy से जुड़े प्रश्न उत्तर

सरोगेसी क्या होता है ?

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Surrogacy एक प्रक्रिया है जिसके द्वारा दंपत्ति जो माँ बाप नहीं बन सकते या किसी भी वजह से माँ बाप नहीं बन पाते, वो सरोगेसी के माध्यम से अपने बच्चे को जन्म दे सकते हैं। इस प्रक्रिया में माता और पिता किसी अन्य महिला की सहायता से (कोख को किराए पर लेकर ) अपने बच्चे को जन्म देते हैं।

सरोगेसी द्वारा मां कैसे बनते हैं?

यदि कोई दम्पति बच्चे की चाह रखते हैं और स्वयं किसी कारणवश माता पिता नहीं बन पा रहे हों तो ऐसे में वो सरोगेसी की मदद ले सकते हैं। इस प्रक्रिया में पुरुष के स्पर्म और स्त्री (माता) के अंडे का मेल टेस्ट ट्यूब में कराया जाता है. इसके बाद सरोगेट मदर या उस महिला के यूट्रस में प्रत्यारोपित किया जाता है जिसकी कोख किराए पर ली गई है। बच्चे का जन्म सरोगेट मदर के गर्भ से ही होगा।

सरोगेट मां कौन होती है ?

सरोगेट माँ वो होती है जो अपने गर्भ में किसी और का बच्चा पालती है और उसे जन्म देती है। सरोगेट मदर को

सरोगेसी अच्छी क्यों है?

सरोगेसी बांझ दंपतियों, एकल लोगों और एलजीबीटी समुदाय के सदस्यों को माता-पिता बनने की अनुमति देती है जब वे बच्चे पैदा करने में सक्षम नहीं हो सकते हैं। ज्यादातर मामलों में, जेस्टेशनल सरोगेसी एक या दोनों माता-पिता को अपने बच्चे से जैविक रूप से संबंधित होने की अनुमति देती है।

सरोगेसी कितने तरह की होती है ?

Surrogacy मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है –
ट्रेडिशनल सरोगेसी (Traditional Surrogacy) में होने वाले पिता या डोनर का स्पर्म सरोगेट महिला के एग्स से मैच कराया जाता है। इस सरोगेसी में सरोगेट मां ही बच्चे की बायोलॉजिकल मां होती है. जबकि दूसरा तरीका है – जेस्टेशनल सरोगेसी (Gestational Surrogacy). इसमें में परखनली प्रक्रिया यानि आई वी एफ के द्वारा माता पता बना जा सकता है। इस सेरोगेसी में सरोगेट मां का बच्चे से कोई जेनेटिक संबंध नहीं होता है.

आज इस लेख के माध्यम से हमने आप को Surrogacy के संबंध में सभी महत्वपूर्ण जानकारी देने का प्रयास किया है। उम्मीद है आप को ये जानकारी आप को उपयोगी लगी होगी। यदि आप ऐसे ही अन्य उपयोगी लेखों के बारे में पढ़ने के इच्छुक हैं तो आप हमारी वेबसाइट Hindi NVSHQ से जुड़ सकते हैं।

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