Corruption Free India Speech for Students and Children hindi | भ्रष्टाचार पर भाषण

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Reported by Rohit Kumar

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वर्तमान समय में भ्रष्टाचार बहुत बड़ी समस्याओं में से एक है। ये एक ऐसी समस्या है जो कि देश को खोखला बना रही है। देश को बचाने के लिए समय रहते ही हम सभी को साथ मिलकर भ्रष्टाचार को रोकने का प्रयास करना चाहिए। जिस से हमारा देश भ्रष्टाचार मुक्त भारत बन सकेगा। भ्रष्टाचार मुक्त भारत बनाने के लिए ये बहुत आवश्यक है कि सभी लोग अपने अपने स्तर पर इसके लिए प्रयास करें और Corruption Free India बनाने के लिए सरकार का साथ दें। आज इस लेख में आप भ्रष्टाचार पर भाषण को पढ़ सकते हैं। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर आप भी इस पर भाषण (Corruption Free India Speech for Students and Children hindi ) का उपयोग कर सकते हैं।

Corruption Free India, ऐसे करें तैयार भ्रष्टाचार मुक्त भारत पर भाषण
भ्रष्टाचार मुक्त भारत पर भाषण

Corruption Free India Speech for Students and Children hindi

सुप्रभात। मैं … (अपना नाम बताएं) यहाँ उपस्थित प्रधानाध्यापक जी, सभी आदरणीय शिक्षकगण, मेरे सभी सहपाठी व यहाँ उपस्थित सभी छात्रों का अभिनन्दन करता हूँ। आज मुझे आप सबके समक्ष भ्रष्टाचार मुक्त भारत / Corruption Free India के विषय पर अपने विचार प्रस्तुत करने का अवसर मिला है। इसके लिए मैं आप सभी का आभारी हूँ।

बात करें Corruption Free India/ भ्रष्टाचार मुक्त भारत की तो सबसे पहले हमे भ्रष्टाचार के अर्थ को समझना होगा। भ्रष्टाचार दो शब्दों से मिलकर बना है भ्रष्ट + आचार। इसका अर्थ होता है भ्रष्ट यानी बुरा आचरण करने वाला। या दुसरे शब्दों में कहें तो कोई भी अनैतिक या अनुचित कार्य करना। इसमें बेईमानी, अपने स्वार्थ के लिए झूठ बोलना, दूसरों का हक़ छीनना, धोखेबाजी करना, अवैध कार्य करना आदि शामिल होता है। आज के समय में भ्रष्टाचार बहुत से क्षेत्रों में व्याप्त है। जिसे दूर कर उसे भ्रष्टाचार मुक्त बनाना बहुत जरुरी है। वरना हमारा देश विकास शील देश होते हुए भी विकसित होने में असमर्थ हो जाएगा। भ्रष्टाचार पर नकेल कसने का बहुत प्रयास किया गया लेकिन अभी तक हम इससे निजात नहीं पा सके हैं। और अब ये बहुत ही महत्वपूर्ण समय है जब हमे इस समस्या को जल्द से जल्द खत्म करना ही होगा।

प्रभाव : भ्रष्टाचार के मामले हमारा देश पूरे विश्व में 85 वें स्थान पर आता है। ये रिपोर्ट ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल द्वारा जारी भ्रष्टाचार सूचकांक द्वारा जारी की जाती है । और आज भी इतने प्रयासों के बाद भी अभी तक हम इससे छुटकारा नहीं पा सके हैं। जिस की वजह से न केवल देश पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा बल्कि इससे हमारे देश की छवि भी धूमिल हो रही है। साथ ही हमारे देश के विकास पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। अगर हमे अपने देश को विकसित देशों की गिनती में लाना है तो हमे भ्रष्टाचार को जड़ों से खतम करना होगा।

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हमारे देश में लगभग हर क्षेत्र में भ्रष्टाचार कहीं न कहीं और किसी न किसी रूप में देखने को मिल ही जाता है। इससे न केवल उस क्षेत्र की उत्पादकता घटती है बल्कि इससे देश के विकास में भी रोड़ा पड़ता है। भ्रष्टाचार निम्न स्तर से शुरू होकर देश में उच्च स्तरीय क्षेत्रों तक भी देखने को मिलता है। देश में उच्च स्तरीय क्षेत्रों में जितना भ्रष्टाचार होगा, देश पर इसका उतना ही व्यापक प्रभाव होता है। देश में आर्थिक स्तर पर भी भारी असमानता दिखाई देती है अमीर व्यक्ति बहुत ही अमीर होता जा रहा है तो वही कोई अन्य बड़ी मुश्किल से गरीबी में अपनी जिंदगी जी रहा है।

एक उदाहरण से इसके प्रभाव को ऐसे समझ सकते हैं – यदि कोई ‘कर चोरी’ (Tax Evation) करता है तो इससे काला धन पैदा होता है। उत्पादन की लागत बढ़ती है जिसे उपभोक्ता को ही वहन करना होता है। एक अन्य केस में, पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार से अपराध की रिपोर्टिंग कम होगी और अपरधियों को प्रोत्साहन मिलेगा। जिससे न केवल अपराध में इजाफा होगा बल्कि भुक्तभोगियों में से भी कई अपराध करने को मजबूर हो जाएंगे। इस प्रकार सामाजिक अराजकता भी बढ़ जाएगी। ऐसे ही अन्य क्षेत्रों में भी भ्रष्टाचार से बहुत ही भयावह स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। जिससे जीना भी दूभर हो जाएगा साथ ही देश की आर्थिक स्थिति के बिगड़ने मात्र से ही देश पर बाहरी आक्रमण का खतरा भी हो सकता है।

लोकोक्तियाँ

Lokoktiyan in Hindi (लोकोक्तियाँ)

कारण : देश में भ्रष्टाचार के इतने किस्से आये दिन सुनने को मिलते हैं कि अब ऐसे खबरें हमे नयी नहीं लगती। भ्रष्टाचार सरकार से लेकर सरकारी संगठन या निजी संगठन या यूँ कहें की हर जगह ही होता है। बस ये अलग अलग रूप में होते हैं। जानते हुए भी हम कई बार अपनी आँखे बंद कर लेते हैं या फिर इसका हिस्सा बन जाते हैं। लेकिन अब सवाल उठता है की भ्रष्टाचार होता ही क्यों है तो इसके बहुत से कारण हैं। जैसे की – व्यापक निरक्षरता, गरीबी, समाज में आर्थिक भेदभाव, लोगों की धन लोलुपता व अन्य स्वार्थ, बिना मेहनत के लाभ प्राप्त करना आदि ऐसे अनेक कारन है जिनकी वजह से आज समाज में भ्रष्टाचारी लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है।

भ्रष्टाचार के कारणों के अतिरिक्त भी ऐसे कई पहलु होते हैं जिनकी वजह से ऐसी समस्याओं को और बल मिलता है। जैसे कि – आने वाली पीढ़ियां जो समाज में हो रहा है उसे देख रही हैं और समय के साथ उनके लिए ये आम बात होती जा रही है। जिसे आगे चलकर ऐसा करने के लिए वो भी नहीं कतराएंगे। इसके अतिरिक्त वो भी इसमें आवश्यकता पड़ने पर रिश्वत देने या अन्य प्रकार के भ्रष्टाचार में भी न चाहते हुए भी शामिल होंगे। आज के समय में नैतिक दिवालियापन भी बहुत बढ़ चूका है जिसके चलते सही गलत की पहचान नहीं कर पा रहे। या समझ कर भी जो चल रहा है उसे चलने दो की तर्ज पर होने दे रहे हैं।

क्या उपाय कर सकते हैं ? ये विचारणीय है कि हम भ्रष्टाचार को रोकने के लिए ऐसा क्या कर सकते हैं जिससे समाज में इस कुरीति को खत्म किया जा सके। तो जैसे कि अभी हमने भ्रष्टाचार के कारणों को जाना, हम इन्ही कारणों के आधार पर इसके उपाय निकाल सकते हैं। देखा जाये तो स्वार्थ और असमानता सबसे प्रमुख कारण हैं। फिर चाहे वो आर्थिक असमानता हो सामाजिक या सम्मान, पद -प्रतिष्ठा आदि से सम्बंधित असमानता के कारण भी व्यक्ति भ्रष्ट बन जाता है। इसके अतिरक्त ऐसे समाज में रह रहा व्यक्ति जहाँ भ्रष्टाचार व्याप्त हो तो उसे भी मजबूरी में साथ देना पड़ता है। इसके अतिरिक्त मनुष्य में हीनता की भावना और ईर्ष्या के चलते, वो भ्रष्टाचार के माध्यम से खुद को संतुष्ट करता है।

हमारे देश के पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम जी ने कहा था कि –

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मुझे विश्वास नहीं है कि भ्रष्टाचार एक एकल नेता, एक राजनीतिक दल या मीडिया द्वारा समाप्त किया जा सकता है। केवल युवाओं के आंदोलन, जो अपने घरों से शुरू होता है, से भ्रष्टाचार समाप्त हो सकता है”.

यहाँ हमे सबसे पहले नैतिकता को जितना हो सके अपनाना होगा और साथ ही इसे बढ़ावा देना होगा। प्रत्येक व्यक्ति को यहाँ अपने स्तर पर कार्य करना होगा और इसकी जिम्मेदारी लेनी होगी। इसके अलावा शिक्षा भी बहुत महत्वपूर्ण है। यदि शिक्षा गुणवत्तापूर्ण होगी तो नौनिहालों को अभी से नैतिकता और सही दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरणा मिलेगी। वो सही गलत का चयन स्वविवेक के आधार पर कर सकेंगे। इसके अलावा कठोर दंड व्यवस्था बनानी होगी। जिससे ऐसे लोगों पर अंकुश लगाया जा सके। साथ ही भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिए नागरिक साहस जुटा पाएं न कि इसके सामने घुटने टेक दें।

अंत में मैं बस इतना कहना चाहूंगा कि भ्रष्टाचार मुक्त भारत पाने के लिए हम सभी को साथ मिलकर व्यक्तिगत स्तर पर नैतिकता, सेवा और ईमानदारी के पुराने आदर्शों को पुनर्जीवित करना होगा। इसके साथ ही अन्य बेहतर देशों से उन प्रणालियों को अपनाना होगा जिनसे देश के सिस्टम में पारदर्शिता आ सके। धन्यवाद।

भ्रष्टाचार पर भाषण से संबंधित प्रश्न एवं उत्तर

भ्रष्टाचार से आप क्या समझते हैं?

भ्रष्टाचार यानी भ्रष्ट आचरण। जिसका अर्थ हुआ कोई भी अनैतिक या अनुचित कार्य। जैसे कि- बेईमानी, धोखेबाजी, स्वार्थ हेतु झूठ बोलना, घूसखोरी व अन्य ऐसे बुरे कार्य जिनसे दूसरों को कष्ट देकर अपना स्वार्थ सिद्ध किया जाता है।

भारत में भ्रष्टाचार के कारण क्या है?

हमारे देश में भ्रष्टाचार के मुख्य कारणों में स्वार्थ और असमानता सबसे प्रमुख हैं। फिर चाहे वो आर्थिक असमानता हो सामाजिक या सम्मान, पद -प्रतिष्ठा आदि से सम्बंधित असमानता के कारण भी व्यक्ति भ्रष्ट बन जाता है। इसके अतिरक्त ऐसे समाज में रह रहा व्यक्ति जहाँ भ्रष्टाचार व्याप्त हो तो उसे भी मजबूरी में साथ देना पड़ता है।

भ्रष्टाचार मुक्त भारत पर स्पीच कैसे लिखे ?

आप की सुविधा के लिए हमने भ्रष्टाचार मुक्त भारत पर स्पीच अपने लेख के माध्यम से दे दी है। आप हमारे लेख को पढ़ सकते हैं।

भ्रष्टाचार के मामले में भारत का कौन सा स्थान है?

जनवरी 2022 में भारत का भ्रष्टाचार के मामले में 85 वां स्थान था।

सबसे भ्रष्ट देश कौन सा है 2022?

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के करप्शन परसेप्शन इंडेक्स 2021 के मुताबिक, एशिया-प्रशांत के तीन सर्वाधिक भ्रष्ट देशों में कंबोडिया, अफगानिस्तान और उत्तर कोरिया शामिल हैं।

आज इस लेख में आप ने Corruption Free India / भ्रष्टाचार मुक्त भारत से संबंधित भाषण के बारे में पढ़ा। उम्मीद है आप को ये जनकारी उपयोगी लगी होगी। यदि आप ऐसे ही अन्य उपयोगी स्पीच, निबंध व लेखों आदि के बारे में पढ़ना चाहते हैं तो आप हमारी वेबसाइट Hindi NVSHQ से जुड़ सकते हैं।

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