जानिए (DAC) डिजिटल एड्रेस कोड कैसे जारी होंगे? | डिजिटल एड्रेस कोड की पूरी जानकारी | Digital Address Codes ke Fayade

जैसा कि आज का समय डिजिटल युग कहा जाता है। जहाँ बहुत से काम डिजिटल माध्यम से किये जा सकते हैं। जिनमे से खासकर जैसे की कोई सामान खरीदना, बेचना, कोई फॉर्म भरना, किसी योजना में आवेदन करना, किसी सर्विस को शुरू करना, अपॉइंटमेंट लेना और बैंक संबधित लेन देन का कार्य पूरा करना आदि सभी वर्तमान में बहुत ज्यादा किया जाने वाला कार्य है। इसी प्रकार अब अन्य जितनी भी सर्विसेज हैं या कोई जानकारी हैं उन्हें भी ऑनलाइन किया जा रहा है। तो इसी कड़ी में अब सरकार ने डिजिटल एड्रेस कोड (Digital Address Codes) जारी करने की तैयारी पूरी कर ली है। आज हम इस लेख में आप को Digital Address Codes व इससे जुडी सभी महत्वपूर्ण जानकारियों को आप के साथ साझा करेंगे। जानने के लिए पूरे लेख को पढ़ें।

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यहाँ जानिए क्या होता है Digital Address Codes ?

 यहाँ जानिये Digital Address Codes
Digital Address Codes

अब आप सोच रहे होंगे की ये डिजिटल अड्रेस कोड क्या है ? तो आप को बता दें कि ये एक प्रकार का डिजिटल रूप में बताया गया किसी स्थान का पता है। जल्द ही सरकार Digital Address Codes की प्रणाली को पूरे देश में शुरू करने वाली है। हर एक नागरिक को एक यूनीक कोड उपलब्ध कराया जाएगा।  यह कोड 12 अंकों का एक यूनीक कोड होगा जिसे कार्यालय व आवासीय पतों के लिए तैयार किया जाएगा।

बता दें कि डिजिटल एड्रेस कोड (DAC) प्रत्येक व्यक्ति का एड्रेस का आधार लिंक यूनीक कोड होगा। इस से भविष्य में ऑनलाइन डिलीवरी जैसी विभिन्न प्रकार की अन्य सुविधाओं में मदद मिलेगी। इस कोड का इस्तेमाल आप कोड टाइप करके या फिर क्यूआर कोड की तरह स्कैन करके घर की सटीक लोकेशन हासिल कर सकते हैं। यही नहीं आप को जगह जगह या बार बार अपना पता / अड्रेस देने की जरुरत नहीं होगी। आप अलग अलग कार्यों को इस कोड की मदद से आसानी से पूरे कर पाएंगे।

जानिए (DAC) डिजिटल एड्रेस कोड कैसे जारी होंगे?

जैसे कि हमने बताया कि जल्द ही पूरे देश में DAC जारी किये जाने वाले हैं। जिसके लिए डाक विभाग द्वारा इस पर कार्य किया जा रहा है। आज के समय में हमारे देश भारत में तकरीबन 75 करोड़ घर होंगे और इन सभी घरों के लिए डिजिटल यूनीक कोड बनाया जाएगा। डिजिटल अड्रेस कोड देश के प्रत्येक पते को डिजिटल अथेंटिकेशन देगा यानी इसका प्रमाणीकरण करेगा। बताते चलें कि देश में जितने भी घर होंगे उन सभी को अलग अलग पहचान दी जाएगी या identify किया जाएगा। और इसके साथ ही इस पते/ पहचान / अड्रेस को जियोस्पेशियल कोऑर्डिनेट्स (geospatial coordinates) से भी लिंक कराया जाएगा। इससे लाभ ये होगा की पहले की अपेक्षा किसी भी घर या पते को सड़क या मोहल्ले के नाम से नहीं बल्कि नंबरों और अक्षरों वाले कोड के जरिये पहचाना जाएगा। ये कोड स्थायी होगा।

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यहाँ समझिये कैसे होगा DAC से काम ?

जैसे की हमने बताया की भारत सरकार द्वारा इस प्रणाली की शुरुआत जल्द ही होने वाली है। भारत सरकार के संचार मंत्रालय के अंतर्गत डाक विभाग डिजिटल अड्रेस कोड के लिए कार्य कर रहा है। डिजिटल अड्रेस कोड एक तरह से पिन कोड की जगह लेगा और प्रत्येक घर या कार्यालय के डिजिटल को-ऑर्डिनेट की तरह कार्य करेगा। इस नयी प्रणाली के लागु होते ही हर घर / कार्यालय का अलग अलग कोड हो जाएगा। फिर चाहे वो एक ही बिल्डिंग में अलग अलग फ्लैट होंगे तब भी उनका अलग अलग कोड (digital unique code) ही बनेगा। यूनीक कोड सरकार द्वारा प्रत्येक पते को वेरीफाई करने के बाद ही जारी किया जाएगा। जिससे इसका उपयोग वर्तमान में लोकेशन ट्रेस करने वाले एप्लीकेशन के परफॉरमेंस से बेहतर होगा। online delivery से लेकर address verification के लिए ई-पते के रूप में कार्य करने के लिए ये सब से बेहतर होगा।

क्यों आवश्यक है डिजिटल एड्रेस कोड ?

डिजिटल अड्रेस कोड आने वाले समय में बहुत ही उपयोगी साबित होने वाले हैं। जैसा की डाक विभाग ने बताया कि वर्तमान में ऐसे सभी एड्रेस प्रूफ डॉक्यूमेंट्स जिनका इस्तेमाल हो रहा है, उनमे एक कमी है और वो ये है कि संबंधित एड्रेस को डिजिटली प्रमाणित नहीं किया जा सकता है। जैसे की हम पते के प्रमाण के रूप में आधार कार्ड, बिजली बिल, पानी बिल आदि का उपयोग करते हैं। लेकिन इनमे से सभी दस्तावेजों में यही समस्या है। जबकि एड्रेस को डिजिटली प्रमाणित करने के लिए उस एड्रेस को डिजिटल लोकेशन (जियोस्पेशल कोऑर्डिनेट्स या भू-स्थानिक निर्देशांक) से लिंक होना जरुरी है । ऐसा होने पर ही व्यक्ति डिजिटल एड्रेस आइडेंटिटी को एड्रेस के ऑनलाइन ऑथेन्टिकेशन के लिए उपयोग किया जा सकेगा।

इसके अलावा आजकल ऑनलाइन खरीद फरोख्त का ट्रेंड बढ़ा है। लोग घर बैठे बैठे ही ऑनलाइन खरीददारी करते हैं और इस खरीदारी को आप के दिए गए पते तक पहुँचाने के लिए डिलीवरी एजेंट को भी सटीक पते तक पहुँचने में कुछ समय लग जाता है। इस लिए डिजिटल अड्रेस कोड की शुरुआत के साथ इस समस्या का भी समाधान हो जाएगा।

बहुत बार फेक एड्रेस का यूज करके ई-कॉमर्स ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी की खबरें आती रहती हैं। इसे खत्म करने के लिए भी Digital Address Codes बहुत प्रभावी होगा। जैसे की अड्रेस डिजिटली लिंक्ड होगा तो उसे ऑनलाइन प्रमाणित किया जा सकेगा। और फ्रॉड रोकने में भी सहायता मिलेगी। इसके अतिरिक्त ये एक शार्ट यूनीक कोड होगा और व्यक्ति को लम्बे चौड़े पता को नहीं देना होगा।

यहाँ जानिये डिजिटल एड्रेस कोड की विशेषताएं?

  • डिजिटल एड्रेस कोड प्रत्येक एड्रेस/ पते के लिए यूनीक होगा। ध्यान दें कि यहाँ ”एड्रेस’ का मतलब प्रत्येक व्यक्ति का आवासीय पता या ऑफिस या बिजनेस होगा।
  • Digital Address Code (DAC) को एड्रेस का प्रतिनिधित्व करने वाले geo special Co-ordinate से जोड़ा जाएगा। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए एड्रेस का प्रतिनिधित्व एड्रेस के एंट्री गेट या गेट पर कोऑर्डिनेट्स करेंगे।
  • जानकारी दे दें कि संवेदनशील प्रतिष्ठानों के लिए डिजिटल एड्रेस कोड जारी नहीं किया जाएगा। इनमे वो प्रतिष्ठान शामिल होंगे जिनके जियोस्पेशल कोऑर्डिनेट्स का खुलासा नहीं किया जा सकता है। ऐसे प्रतिष्ठानों के लिए अलग व्यवस्था की जाएगी जैसे कि इन्हे ‘पड़ोस’ या शहर के कोऑर्डिनेट्स से जोड़ा जा सकता है।
  • शुरुआत में कुल 12 डिजिट का डिजिटल अड्रेस कोड जारी किया जाएगा।

Digital Address Codes ke Fayade यहाँ जानिये

जल्द ही पूरे देश में डिजिटल अड्रेस कोड को जारी कर दिया जाएगा। आइये जानते हैं इसे लागू करने से सभी नागरिकों को क्या लाभ होगा और इसकी अन्य की विशेषताएं होंगी।

  • डिजिटल अड्रेस कोड से न केवल पहले की अपेक्षा सुविधा बढ़ जाएगी बल्कि सटीक लोकेशन जानने में भी सहायता मिल जाएगी।
  • इन कोड्स के माध्यम से हर घर के ऑनलाइन पते का वेरिफिकेशन (Address Verification) भी बहुत ही आसानी से हो जाएगा। ये एक तरह के पते का प्रमाणपत्र के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकेगा।
  • बैंकिंग क्षेत्र में, बीमा, टेलीकॉम क्षेत्र आदि में ई- केवाईसी (E – KYC) आवश्यक होता है। डिजिटल अड्रेस कोड के माध्यम से ये भी बहुत आसानी से किया जा सकेगा।
  • इस का लाभ सरकारी योजनाओं में होने वाले फर्ज़ीवाड़े व अन्य भ्रष्टाचार से बचने के लिए भी काफी कारगर होगा।
  • इसका लाभ बहुत से क्षेत्रों में प्राप्त होगा जैसे कि –
    • ई-कॉमर्स कम्पनी तथा एनबीएफसी (NBFC) कंपनियों की सर्विस में
    • सम्पति (Property), टैक्सेशन, आपदा प्रबंधन और जनगणना तथा जनसंख्या रजिस्टर को बनाने हेतु सहायक।
    • वन नेशन वन एड्रेस (One Nation One Address) को लागू करने में सहायक
  • DAC के माध्यम से आप को अपना पूरा अड्रेस कहीं दर्ज करने की आवश्यकता नहीं होगी। आप सिर्फ अपने DAC Number को बताकर अपने घर का सटीक पता बता सकते हैं।
  • कूरियर, पोस्ट या अन्य ऐसी ही कोई सुविधा का लाभ प्राप्त करने के लिए आप को अधिक मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी। जैसे कि आजकल कई बार हमे सटीक पता बताने के बावजूद भी कूरियर वाले या ऐसे ही अन्य किसी सुविधा के लिए संबंधित व्यक्ति सही पते पर नहीं पहुँच पाते। ऐसे में काफी समय लग जाता है। लेकिन एक बार डिजिटल अड्रेस कोड की शुरुआत के बाद ये समस्या नहीं रहेगी।
  • इस मैप को डिजिटल मैप्स भी देख सकेंगे। जिससे एक्यूरेसी से संबंधित समस्या भी नहीं रहेगी।

डिजिटल एड्रेस कोड से संबंधित प्रश्न उत्तर

डिजिटल एड्रेस कोड क्या है ?

ये एक प्रकार से किसी स्थान का सटीक पता है। इसे आप 12 अंकों का एक यूनीक कोड भी कह सकते हैं ,जिसे कार्यालय व आवासीय पतों के लिए तैयार किया जाएगा।

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DAC का Full Form क्या है ?

डीएसी का फुल फॉर्म है – Digital Address Codes

डिजिटल अड्रेस कोड कितने अंकों का होगा ?

डिजिटल अड्रेस कोड कुल 12 अंकों का होगा।

डिजिटल अड्रेस कोड की शुरुआत भारत में कौन सा मंत्रालय कर रहा है ?

इसकी जिम्मेदारी भारत सरकार के संचार मंत्रालय के अंतर्गत डाक विभाग /पोस्ट ऑफिस विभाग के पास है।

आज इस लेख में आप ने Digital Address Codes के बारे में जनकारी प्राप्त की। उम्मीद है आप को ये जानकारी पसंद आयी होगी। ऐसी ही अन्य महत्वपूर्ण और उपयोगी जानकारियों के लिए आप हमारी वेबसाइट Hindi NVSHQ से जुड़ सकते हैं।

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