छत्रपति साहू महाराज जीवनी – Biography of Chhatrapati Shahu Maharaj in Hindi Jivani

मराठा साम्राज्य के शासन इतिहास में कई ऐसे शासक आए जिन्होंने अपने कार्यों के बल पर अपना नाम पूरे विश्व में प्रसिद्ध कर लिया और इतिहास में उनका नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज किया गया है। इन्हीं शासकों में से एक महान शासक छत्रपति साहू महाराज भी थे जिन्हें उनके सामाजिक सेवा एवं कार्य के ... Read more

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Reported by Saloni Uniyal

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मराठा साम्राज्य के शासन इतिहास में कई ऐसे शासक आए जिन्होंने अपने कार्यों के बल पर अपना नाम पूरे विश्व में प्रसिद्ध कर लिया और इतिहास में उनका नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज किया गया है। इन्हीं शासकों में से एक महान शासक छत्रपति साहू महाराज भी थे जिन्हें उनके सामाजिक सेवा एवं कार्य के लिए जाना जाता है। राजा के रूप में ये एक प्रजातंत्र वादी भी थे। इन्होंने अपने शासन काल में गरीब, असहाय एवं दलित वर्गों के जीवन को सुधारने के लिए कई कार्य किए, जिन्हें मराठा शासन में किसी भी अन्य राजा ने नहीं किया होगा। इसके अतिरिक्त यह बच्चों से बहुत प्यार करते थे, इन्होंने बच्चों को निशुल्क शिक्षा प्रदान एवं छात्रावासों का भी निर्माण कराया ताकि बाहर से आने वाले छात्र इसमें रह सके। इन्होंने समाज में हो रहे अंधविश्वास जैसे बाल विवाह पर रोक लगाई। आज हम यहां छत्रपति साहू महाराज जीवनी (Biography of Chhatrapati Shahu Maharaj in Hindi Jivani) के बारे में जानेंगे, इच्छुक नागरिक सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करने के लिए इस आर्टिकल को अंत का ध्यानपूर्वक अवश्य पढ़ें।

छत्रपति साहू महाराज जीवनी

Chhatrapati Shahu Maharaj का जन्म महाराष्ट्र राज्य के कोल्हपुर जिले के कागल नामक एक गांव में 26 जून 1874 को हुआ था। बचपन में इन्हें लोग यशवंतराय नाम से पुकारा करते थे। इनके पिता का नाम जयश्री था जो कि घाटगेट गांव के प्रमुख मुखिया थे एवं इनकी माता राधाबाई थी जो कि एक शाही परिवार की पुत्री थी।

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कुछ साल बाद इनकी माता की मृत्यु हो गयी थी उस समय ये केवल 3 साल के थे। उसके बाद इनकी देखभाल जीजाबाई ने की थी जो कि इनकी दादी थी। कुछ साल बाद जय श्री राव अर्थात इनके पिता की भी निधन हो गया था उस समय ये केवल 20 साल के थे। कई इतिहासकारों ने कहा है कि जब महाराज 10 साल के थे तो उनको शिवाजी चतुर्थ एवं उनकी पत्नी आनंदीबाई ने इन्हें गोद ले लिया था। आपको बता दे उस समय शिवाजी चतुर्थ कोल्हपुर रियायत के शासक थे। अपने जीवन में ये ज्योतिबा फुले के विचारों से अत्यधिक प्रभावित हुए थे।

Biography of Chhatrapati Shahu Maharaj in Hindi Jivani

नामछत्रपति साहू महाराज
जन्म26 जून 1874
जन्म स्थानकागल गांव, कोल्हपुर (महाराष्ट्र)
अन्य नामयशवंतराव
धर्महिन्दू
राज्याभिषेक1894
शासनकाल1894-1922
माता का नामराधाबाई
पिता का नामजय श्री राव
पत्नी का नामलक्ष्मीबाई
मृत्यु10 मई 1922
मृत्यु स्थानमुंबई
नागरिकताभारतीय
कर्म क्षेत्रसमाज सेवा
छत्रपति साहू महाराज जीवनी - Biography of Chhatrapati Shahu Maharaj in Hindi Jivani
छत्रपति साहू महाराज जीवनी

विवाह

Shahu Maharaj के वैवाहिक जीवन की बात करें तो उनकी चार पत्नियां थी तथा इनकी चार बेटी एवं 2 बेटे थे। ऐसा कहा जाता है कि इन्होंने दोनों बेटों को गोद लिया हुआ था, इसमें एक बेटे का नाम संभाजीराजे था तथा दूसरे बेटे का नाम फतेहसिंह था, जो कि मेहरबास सयाजी लोखंडे का बेटा था इन्होंने ही राजा को अपना पुत्र गोद में दिया। जब इसे गोद लिया गया था तो उस वक्त इसका नाम रानू जी लोखंडे था जिसको बाद में राजा ने बदल दिया और उसका नाम फ़तेह सिंह रख दिया। दो पुत्रों को गोद लेने के अलावा इन्होंने एक तीन साल की पुत्री को भी गोद लिया जिसका नाम पार्वतीबाई था। पार्वतीबाई जब 15 साल की हो गई थी तो राजा ने इनकी शादी श्रीमंत सदाशिव राव भाऊ से कर दिया। राजा के मरने के बाद शासन में उनके बड़े पुत्र संभाजीराजे को बैठाया गया था उन्होंने ने ही राज्य का कारोबार संभाला था।

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शिक्षा

Chhatrapati Shahu Maharaj की शिक्षा की बात करें उन्होंने राजकोट के राजकुमार महाविद्यालय तथा धारवाड़ से अपनी शिक्षा को पूरा किया था। इनको वर्ष 1894 में राजा का पद प्रदान किया गया था। समाज में लोगों की परेशानियों को देखकर उन्होंने निर्णय लिया कि वे गरीब एवं असंगठित लोगों को सहायता प्रदान करेंगे। राज्याभिषेक होने के बाद ही यह अपने कार्य पर लगे गए थे।

राज्याभिषेक

जैसा कि हमने आपको ऊपर लेख में बताया कि शिवाजी चतुर्थ तथा उनकी पत्नी आनंदीबाई ने शाहू महाराज को गोद लिया हुआ था। जब वे 20 वर्ष के थे तो इनके पिता (शिवाजी चतुर्थ) की मृत्यु हो गयी थी उसके पश्चात वर्ष 1994 में इनका राज्याभिषेक किया गया था और इन्होंने 20 वर्ष की आयु में कोल्हपुर की बागडोर संभली। यह एक शूद्र जाति के थे और पहले शूद्र जाति के किसी भी व्यक्ति को राजा नहीं बनाया जाता था, इसलिए राज्याभिषेक में इन्हें बहुत आलोचनाएँ झेलनी पड़ी। ब्राह्मणों ने इनका राजतिलक अपने हाथों के बदले पैर के अंगूठे से किया जिसकी वजह से इन्हें बहुत दुःख हुआ। इसी दुख को सहकर उन्होंने अपने राज्याभिषेक के बाद दलितों, गरीबों तथा शूद्रों पर होने वाले सामाजिक भेदभाव को समाप्त किया। राजा ने अपने सम्पूर्ण जीवन में लोगों का भला ही किया वे अन्य राजाओं से बिल्कुल अलग थे उनकी दरियादिली के कारण लोग उन्हें बहुत पसंद करते थे।

विद्यालयों तथा छात्रवासों की स्थापना

जैसा कि आप सभी जानते है कि पहले जमाने में वैश्य और शूद्र को राज्य की गद्दी पर नहीं बैठने दिया जाता था उनका बहुत विरोध होता था पहले यदि कोई राज्य का राजा बनेगा तो वह ब्राह्मण या फिर क्षत्रिय इसके अतिरिक्त कोई नहीं। समाज में शूद्र और वैश्य के साथ भेदभाव किया जाता था। परन्तु आपको बता दे शिवजी भी एक शूद्र ही थे ऐसा कहा जाता है।

एक शूद्र जाति के होने के बावजूद भी उन्होंने समाज में दलितों, पिछड़ी जातियों के साथ-साथ महार, ईसाई, जैन, मराठा, ब्राह्मण, मुस्लिम, वैश्य तथा क्षत्रिय वर्गों के लिए अलग-अलग सरकारी संस्थाओं को स्थापित किया। राजा ने राज्य में बच्चों को पढ़ाने के लिए स्कूलों का निर्माण कराया ताकि बच्चों को मुफ्त में शिक्षा प्रदान की जा सके, तथा छात्रावासों का भी निर्माण कराया ताकि दूर एवं बाहर के बच्चे रह सके। बाद में उन्होंने कॉलेजों की भी स्थापना कराई ताकि बच्चे अपनी उच्च शिक्षा को भी पूर्ण कर सके और आर्थिक मदद भी प्रदान की। इन स्कूल और कॉलेजों में पढ़ने वाली पिछड़ी जाति के छात्र-छात्रों को उनसे बहुत प्रेरणा मिली और सब के जीवन में सुधार आया जिससे उनका विकास हुआ। इसके अलावा उन्होंने प्रत्येक वर्गों के लिए कार्य किए और समाज में लोगों की सेवा की इसलिए मराठा साम्राज्य के इतिहास में इन्हें समाज सुधारक शासक के रूप में जाना जाता है।

डॉ. भीमराव अम्बेडकर से मुलाकात

एक बार दत्तोबा पवार जो कि एक कलाकार था तथा दितोबा दलवी ने छत्रपति को भीमराव अम्बेडकर से मुलाकात करवाई थी। राजा अम्बेडकर जी की क्रांतिकारी विचार एवं उनका समाज में प्रति सब को सामान रूप से देखना, को प्रभावित कर गया। इसके अतिरिक्त भी वे मिलते रहते थे वर्ष 1917 में भी वे मिले और वर्ष 1921 में, वे दोनों आपस में समाज में दलितों, गरीबों के प्रति गलत सोच को समाप्त करना चाहते थे। 22 मार्च वर्ष 1920 को इन्होंने दलितों के कल्याण के लिए एक जनसमूह का आयोजन भी किया था इसमें अम्बेडकर जी को शिकवि ने अध्यक्ष बनाया क्योंकि वे कहते थे कि यह एक समाज सुधारक है जो समाज के हर वर्ग के लिए कार्य करते है, इस सभा में भीमराव जी ने दान भी किया था।

मृत्यु

कोल्हपुर में 6 मई 1922 को छत्रपति साहू महाराज का देहांत हो गया था यह उस समय 47 साल की आयु के थे। मरने के पश्चात कोल्हपुर का उत्तराधिकारी राजाराम को बनाया गया जो कि इनके बड़े पुत्र थे।

छत्रपति साहू महाराज जीवनी से सम्बंधित प्रश्न/उत्तर

छत्रपति साहू महाराज का जन्म कब हुआ था?

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इनका जन्म 26 जून 1874 में महाराष्ट्र राज्य के कोल्हपुर जिले के कागल गांव में हुआ था।

Chhatrapati Shahu Maharaj की मृत्यु कब हुई?

इनकी मृत्यु 10 मई 1922 को मुंबई में हुई थी।

Chhatrapati Shahu Maharaj के माता-पिता का क्या नाम था?

इनकी माता का नाम राधाबाई तथा पिता का नाम जय श्री राव था।

Chhatrapati Shahu Maharaj का शासनकाल कितने वर्ष का था?

इस राजा का शासन काल वर्ष 1894 से लेकर वर्ष 1922 तक था।

छत्रपति साहू महाराज की पत्नी का नाम क्या था?

इनकी पत्नी का नाम लक्ष्मीबाई था।

छत्रपति साहू महाराज का राज्याभिषेक कब हुआ?

इनका राज्याभिषेक वर्ष 1894 को हुआ था उसके पश्चात इन्होंने कोल्हपुर की बागडोर संभाली।

Biography of Chhatrapati Shahu Maharaj in Hindi Jivani से सम्बंधित प्रत्येक जानकारी को हमने इस लेख के माध्यम से आपको साझा कर दिया है। यदि आपको इस लेख से जुड़ी और जानकारी या कोई प्रश्न पूछना है तो आप नीचे दिए हुए कमेंट बॉक्स में अपना प्रश्न लिख सकते है हम कोशिश करेंगे कि आपके प्रश्नों का जल्द ही उत्तर दे पाए। आशा करते है कि आपको हमारा यह लेख पसंद आया हो और इससे जानकारी जानने में मदद मिली हो। इसी तरह की अन्य जानकारी के लिए हमारी साइट को विजिट करें।

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