भारत में बैंकिंग का इतिहास – History of Banking in India

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History of Banking in India: हम जब भी एक दूसरे के साथ वस्तु विनिमय के तहत वित्तीय लेन देन करते हैं तो इस कार्य में जो संस्था हमारी मदद करती है उसे बैंक (Bank) कहा जाता है। अगर हम कहें की बैंक हमारे देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी (Backbone) है तो यह गलत नहीं होगा। बैंक हमारी सभी आर्थिक जरूरत को पूरा करता है। लेकिन दोस्तों क्या आपको पता है हमारे देश में बैंकिंग प्रणाली (Banking System) की शुरुआत कब हुई, हमारे देश में बैंकिंग का इतिहास क्या है ?

History of Banking in India
जानें भारत में बैंकिंग का इतिहास

यदि आप पाठक दोस्तों में से कोई बैंकिंग प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करता है उसे पता होगा की अधिकतर बैंक से संबंधित प्रतियोगी परीक्षाओं में बैंक के इतिहास और वर्तमान कार्यशैली से जुड़े प्रश्न (Question) पूछे जाते हैं। दोस्तों आज के आर्टिकल में हम आपको इन्हीं सब प्रश्नों के जवाब देने जा रहे हैं। यदि आप भी इस तरह की जानकारी को जानने के इच्छुक हैं तो आपको हमारा यह आर्टिकल अंत तक जरूर पढ़ना चाहिए।

स्वतंत्रता से पूर्व भारतीय बैंकिंग का इतिहास:

ऐसा माना जाता है हमारे देश में आधुनिक बैंकिंग की शुरुआत 18वीं शताब्दी में ब्रिटिश काल के दौरान हुई थी। अंग्रेजों के भारत आने से हमारे देश में अधिकतर वित्तीय लेन देन साहूकारों और महाजनों के द्वारा किया जाता था। जब 18वीं शताब्दी में अंग्रेजों ने भारत में ईस्ट इंडिया कम्पनी की शुरुआत की तो मुंबई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों में कुछ एजेंसी गृहों की शुरुआत की जो लोगों को जरूरत के अनुसार ऋण प्रदान किया करते थे। आपको वित्तीय एजेंसियां ईस्ट इण्डिया कम्पनी के अंग्रेज अधिकारी और कर्मचारियों के द्वारा चलाई जाती थी।

  • भारत में अंग्रेजों की यूरोपीय बैंकिंग व्यवस्था के आधार पर सन 1770 में बैंक ऑफ़ हिन्दुस्तान की स्थापना की गई। लेकिन यह बैंक बिगड़ते आर्थिक हालात के कारण सन 1830 में बंद हो गया।
  • इसी क्रम में आगे बढ़ते हुए सन 1786 में बैंक ऑफ़ कलकत्ता (अब कोलकाता) की स्थापना हुई। लेकिन कुछ कारणों की वहज से सन 1791 में इस बैंक को बंद करना पड़ा।
  • इसके बाद सन 1806 में अंग्रेज अधिकारी वेलेजली ने टीपू सुल्तान से लड़ाई को फंड करने हेतु मद्रास बैंक की स्थापना की। जिसका सन 1809 में नाम बदलकर बैंक ऑफ़ बंगाल रख दिया गया।
  • स्वतंत्रा से पूर्व देश में छोटे और मंझले बैंकों की संख्या मिलाकर कुल 600 से अधिक बैंक थे।
  • इसी तरह देश के कुछ अन्य बड़े बैंक इलाहाबाद बैंक1865, पंजाब नेशनल बैंक 1894, बैंक ऑफ़ इंडिया 1906, बैंक ऑफ़ बड़ौदा1908, सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया 1911 स्थापित हुए।

स्वतंत्रता के बाद भारत में बैंकिंग का इतिहास (1947 से लेकर 1991 तक):

  • भारत की आजादी के बाद देश में तत्कालीन इंदिरा गांधी जी की सरकार के समय बैंकों का राष्ट्रियकरण किया गया।
  • बैंकों के राष्ट्रीयकरण के प्रथम चरण में कुल 14 बड़े बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया। यह राष्ट्रीयकरण बैंकों के विस्तार ,समेकन और कर्मचारियों की वेतन वृद्धि को लेकर किया गया था।
  • वर्ष 1991 में RBI ने 10 निजी वित्तीय संस्थाओं ICICI, Axis Bank, HDFC, DCB, Indusland Bank आदि को बैंकिंग लाइसेंस प्रदान किये।

भारत में वर्तमान बैंकिंग प्रणाली में बैंक के प्रकार:

हमारे देश में बैंकिंग व्यवस्था को दो भागों में बांटा गया है जो इस प्रकार से है –

Scheduled_banking_structure_in_India
  • Scheduled Banks (अनुसूचित बैंक): भारतीय रिज़र्व बैंक ने भारत सरकार द्वारा निर्धारित बैंकिंग अधिनियम 1934 के तहत वाणिज्यिक बैंक और सहकारी बैंक को आपस में मर्ज करके Scheduled bank अनुसूचित बैंकिंग की शुरुआत की है। इस तरह के सभी बैंक भारतीय बैंकिंग विनिमय अधिनियम 1949 के तहत अपना कार्य करते हैं।
  • लेकिन दोस्तों इन अनुसूचित बैंकों में Commercial banks को गैर-अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक में शामिल किया गया है। आपको बता दें की Commercial बैंक का कार्य मुख्य रूप से profit basis और Advance/लोन के उद्देश्यों को पूरा करना है। कार्य के आधार पर कमर्शियल बैंक को चार भागों में बांटा गया है जो इस प्रकार है –
    • Public Sector Banks
    • Private sector Banks
    • Foreign Banks
    • Regional Rural Banks
  • Non-Schedule bank (गैर-अनुसूचित बैंक): बैंकिंग नियमों में गैर-अनुसूचित बैंक को बैंकिंग अधिनियम 1949 के भाग 10 की धारा 5 के खंड ग में परिभाषित किया है। जैसा की आप जानते हैं की भारतीय रिज़र्व बैंक देश का एक मात्रा सेंट्रलाइज्ड बैंक है जिसके द्वारा जारी किये गए दिशा-निर्देशों और नियमों को देश के प्रत्येक बैंक को मानने होते हैं।

क्या होते है Public Sector Banks (सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक): 

देश में जो भी बैंक भारत सरकार द्वारा पोषित और संचालित किये जाते हैं वह PSU या पब्लिक सेक्टर बैंक कहलाते हैं। इन बैंकों में 50% की हिस्सेदारी भारत सरकार की होती है। आपको बता दें की इस तरह के सभी बैंक Scheduled Banks की सूची के तहत शामिल किये गए हैं।

क्या होते है Private sector Banks (निजी क्षेत्र के बैंक): 

भारत सरकार के बैंकिंग अधिनियम 1956 के तहत निजी संस्थानों / व्यक्तियों द्वारा चलाये जा सभी बैंक प्राइवेट बैंक कहलाते हैं। सभी प्राइवेट banks को बैंकिंग अधिनियमों के तहत स्वयं को RBI के पास रजिस्टर करना होता है।

क्या होते हैं Regional Rural Banks (RRBs)- क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (आरआरबी): 

Regional Rural Banks (RRBs) को हिंदी में ग्रामीण क्षेत्रीय बैंक कहा जाता है। यह बैंक देश में ग्रामीण स्तर पर कार्य करने हेतु बनाये गए हैं। इन बैंकों से देश के छोटे मझले किसान , मजदूर अपनी आवश्यकता अनुसार सस्ती ब्याज दरों पर लोन प्राप्त कर सकते हैं।

क्या होते हैं Development Banks (विकास बैंक):

देश में 1948 में स्थापित भारतीय औद्योगिक वित्त निगम (IFCI) द्वारा एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक ऑफ़ इंडिया की शुरुआत हुई थी। आपको बताते चलें की सन 1982 में नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेन्ट (NABARD) की स्थापना की गई जिसके तहत लघु उद्योग विकास बैंक ऑफ़ इण्डिया (SIDBI) की शुरुआत हुई। आप लिस्ट में देश के विकास बैंक के बारे में जान सकते हैं।

  • नाबार्ड
  • निर्यात आयात बैंक ऑफ इंडिया
  • राष्ट्रीय आवास बैंक
  • भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक
  • पूर्वोत्तर विकास वित्त निगम
  • आईएफसीआई
  • आईडीबीआई
  • आईसीआईसीआई
  • IIBI
  • SCICI लिमिटेड

भारत में बैंकिंग से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य (Important facts):

  1. भारत में सबसे पहला बैंक का नाम “बैंक ऑफ़ हिन्दुस्तान” था जिसकी स्थापना सन 1770 में अंग्रेजों द्वारा कोलकाता में की गई थी।
  2. भारत के नागरिकों द्वारा देश का पहला प्रतिबंधित बैंक अवध वाणिज्य बैंक था।
  3. भारत में कार्य करने वाला पहला विदेशी बैंक HSBC है।
  4. देश में ISO सर्टिफिकेट प्राप्त करने वाला देश का पहला बैंक है केनरा बैंक।
  5. देश के बाहर अपनी शाखा खोलने वाला भारत का पहला बैंक है बैंक ऑफ़ इण्डिया।
  6. भारत में ATM सेवा की शुरुआत करने वाला पहला बैंक है HSBC जिसने सन 1987 में मुंबई से ATM सेवा को शुरू किया।
  7. इलाहाबाद बैंक देश का ऐसा बैंक है जिसके पास देश के पहले बैंक का एक joint-stock public bank (Oldest) स्टॉक है।
  8. भारत का पहला यूनिवर्सल बैंक कहा जाने वाला बैंक है ICICI (इंडस्ट्रियल क्रेडिट एंड इंवेस्टमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया)
  9. सन 1883 में देश में चेक द्वारा वित्तीय लेन देन की शुरुआत करने वाला पहला बैंक है बंगाल बैंक।
  10. बैंकिंग व्यवस्था में Saving Account (बचत खाता) की शुरुआत करने वाला पहला बैंक है प्रेसीडेंसी बैंक जिसने यह सेवा सन 1833 में शुरू करी थी।
  11. ICICI भारत में पहला ऐसा बैंक बना जिसने अपने ग्राहकों को इंटरनेट बैंकिग की सुविधा प्रदान की।
  12. ग्राहकों को म्यूचल फंड बेचने वाला देश का पहला बैंक है भारतीय स्टेट बैंक।
  13. देश में अपने ग्राहकों को क्रेडिट कार्ड जारी करने वाला पहला बैंक है सेंट्रल बैंक ऑफ़ इण्डिया।
  14. भारत का पहला डिजिटल बैंक है डीजीबैंक
  15. देश में ग्रामीण क्षेत्रीय बैंकिंग की शुरुआत करने वाला बैंक है सिंडिकेट बैंक

भारतीय बैंक के इतिहास से संबंधित प्रश्न एवं उत्तर (FAQs):

एक्सिस रिसीवेबल्स सूट ARS को लांच करने वाला भारत का पहला बैंक कौन सा है ?

एक्सिस रिसीवेबल्स सूट ARS सुविधा को लांच करने वाला भारत का पहला बैंक एक्सिस बैंक (Axis bank) है।

किस बैंक के द्वारा भारतीय सेना के जवानों के लिए योद्धा सह ब्रांडेड RuPay क्रेडिट कार्ड लांच किया गया ?

बैंक ऑफ़ बड़ौदा (BOB) फाइनेंशियल सॉल्यूशंस के द्वारा भारतीय सेना के जवानों के लिए योद्धा सह ब्रांडेड RuPay क्रेडिट कार्ड लांच किया गया है।

भारतीय राष्ट्रिय भुगतान निगम (NPCI) की स्थापना कब हुई ?

भारतीय राष्ट्रिय भुगतान निगम (NPCI) की स्थापना वर्ष 2008 में RBI के द्वारा की गयी।

बैंकों के राष्ट्रीयकरण के दूसरे चरण में कितने बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया ?

बैंकों के राष्ट्रीयकरण के दूसरे चरण में 6 बैंकों का राष्ट्रिय करण किया गया।
आंध्रा बैंक – 20 नवंबर 1923 – मुख्यालय (हैदराबाद)
पंजाब एवं सिंध बैंक – 24 जून 1908 – मुख्यालय (दिल्ली)
विजया बैंक – 23 अक्टूबर 1931 – मुख्यालय (बंगलौर)
कॉर्पोरेशन बैंक – 12 मार्च 1906 – मुख्यालय (मंगलौर)
ओरियंटल बैंक ऑफ़ कॉमर्स – 19 फरवरी 1943 – मुख्यालय (गुड़गांव)
न्यू बैंक ऑफ़ इण्डिया – 1936 – मुख्यालय (नई दिल्ली)

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