ओशो जीवनी – Biography of OSHO in Hindi Jivani

दुनिया में लोगों को ध्यान शक्ति महसूस कराने के लिए ओशो द्वारा कई ध्यान विधियां बताई गई थी जिससे हमें ध्यान की शक्ति का बोध हो सके। वैसे तो आपने ओशो का नाम तो अवश्य सुना होगा क्योंकि ये भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में प्रसिद्ध थे यदि आप इनके बारे में नहीं ... Read more

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Reported by Saloni Uniyal

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दुनिया में लोगों को ध्यान शक्ति महसूस कराने के लिए ओशो द्वारा कई ध्यान विधियां बताई गई थी जिससे हमें ध्यान की शक्ति का बोध हो सके। वैसे तो आपने ओशो का नाम तो अवश्य सुना होगा क्योंकि ये भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में प्रसिद्ध थे यदि आप इनके बारे में नहीं जानते या इनका नाम पहली बार सुन रहें है तो आपको बता दें यह एक आध्यात्मिक गुरु थे। तथा अपने पर लगे विवादों से चर्चित यह गुरु पहले नम्बर पर आते थे। भारत में वापस लौटने के बाद ये अलग-अलग स्थानों पर विचरण करते थे तथा अपने मुक्त विचारों के कारण विश्व में प्रसिद्ध हो गए। इन्हें लोग आचार्य रजनीश कहकर भी बुलाते थे। कई लोग तो इनके विचारों को पसंद करते है तो कई लोग इनकी बातों और विचारों का विरोध करते थे आपको यहां हम ओशो जीवनी (Biography of OSHO in Hindi Jivani) से जुड़ी प्रत्येक जानकारी देने जा रहें है, जो भी इच्छुक नागरिक इनकी जीवनी की सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करना चाहते है उन्हें इस आर्टिकल के लेख को अंत तक जरूर ध्यानपूर्वक पढ़ना है।

ओशो का जीवन परिचय

ओशो का जन्म मध्य प्रदेश राज्य के रायसेन जिले के एक छोटे गांव कुचवाड़ा में 11 दिसंबर 1931 को हुआ था। इनके पिता का नाम बाबूलाल जैन था जो कि कपड़ों का व्यापार करते थे, तथा माता का नाम सरस्वती बाई जैन था। यह अपनी माता-पिता की ग्यारहवीं संतानों में से सबसे बड़े थे और बाकी सब इनसे छोटे थे इनकी चार बहनें और छः भाई थे। ये बचपन में अपने दादा-दादी के बहुत करीब रहते थे यह उनसे बहुत प्रेम करते थे। इनका वास्तविक नाम चंद्र मोहन जैन था।

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Biography of OSHO in Hindi Jivani

ओशो जीवनी - Biography of OSHO in Hindi Jivani
ओशो जीवनी
नामआचार्य रजनीश, ओशो
पूरा नामचंद्र मोहन जैन
जन्म11 दिसंबर 1931
जन्म स्थानरायसेन, मध्य प्रदेश
पेशाआध्यात्मिक शिक्षक एवं रजनीश आंदोलन के नेता
राष्ट्रीयताभारतीय
आयु58 वर्ष (मृत्यु के समय)
मृत्यु19 जनवरी 1990
मृत्यु स्थानपुणे, महाराष्ट्र
राशिधनु
गृहनगरबरेली, मध्य प्रदेश
धर्महिन्दू
शैक्षिक योग्यतादर्शनशास्त्र में परास्नातक
स्कूलपता नहीं
कॉलेजहीतकर्णी कॉलेज, जबलपुर, डी. एन. जैन. कॉलेज, जलपुर
सागर यूनिवर्सिटी, मध्य प्रदेश

परिवार (Family)

पिता का नामबाबूलाल जैन
माता का नामसरस्वती बाई जैन
भाईनिकलंक कुमार जैन, विजय कुमार खाते, अकलंक कुमार खाते, अमित मोहन खाते तथा शैलेन्द्र शेखर
बहननिशा खाते, रसा कुमारी, नीरू सिंघाई, स्नेहलता जैन
वैवाहिक स्थितिअविवाहित

शिक्षा

आचार्य जी की शिक्षा की बात करें तो इन्होंने अपने गांव कुचवाड़ा से ही प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की थी। ये बचपन से ही एक साहसी और होनहार छात्र थे, इन्हें अगर कोई भी प्रश्न पूछना हो तो बेझिझक पूछ देते थे। ये अपनी साहस प्रतिभा से बहुत प्रसिद्ध थे इनके सवाल पुरोहित और पंडितों को भी हैरान कर देते थे। ये स्कूल में सबसे प्रतिभा वान छात्र थे और अपनी कक्षा में सबसे अधिक अंक लेकर हमेशा उत्तीर्ण होते थे।

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ये एक जिज्ञासु प्रवृति के बालक थे और शिक्षकों से कई सवाल पूछा करते थे, जो कि उन्हें भी समझ नहीं आते थे। अत्यधिक सवाल पूछने के कारण इनके अध्यापक इनसे परेशान हो गए थे और कई बार इन्हें स्कूल नहीं आने देते थे।

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जब इन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा को पूरा किया उसके बाद ये सागर विश्वविद्यालय चले गए यह विश्वविद्यालय मध्य प्रदेश के जबलपुर में स्थिति था यहां इन्होंने दर्शनशास्त्र में स्नातक डिग्री को हासिल किया।

करियर की शुरुआत

वर्ष 1998 में Osho जबलपुर गए और दर्शनशास्त्र के लेक्चरर के पद के जबलपुर यूनिवर्सिटी के लिए चुने गए और अपना काम करने लगे, पढ़ाने के अतिरिक्त ये समय-समय पर भारत के भ्रमण के लिए भी निकल जाते थे। और उस समय ये भारत में सभी लोग इन्हें आचार्य रजनीश के नाम से बुलाया करते थे। ये लोगों को हमेशा बताते थे कि भारत तब जाकर पूर्ण रूप से समृद्ध होगा जब तक यहाँ विज्ञान और प्रौद्योगिक कार्य नहीं किए जाएंगे। इन्होंने सेक्स आध्यात्मिक विकास के लिए पहली बार कार्य किया ये भारतीय रूढ़िवादी धर्मों एवं अनुष्ठानों की घोर निंदा करते थे। इस कारण भारतीय लोगों ने उनका खूब विरोध किया तो कई लोग इनके समर्थन में खड़े हुए थे और इनकी बातों को सही बताते थे।

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इन्होंने केंद्रित शिक्षाओं प्रचार-प्रसार करने के लिए जीवन जाग्रति केंद्र को वर्ष 1962 में आयोजित किया था। वर्ष 1966 में आध्यात्मिक शिक्षाओं को देते थे और इसके लिए अपनी नौकरी से भी इस्तीफा दे दिया और ये एक आध्यात्मिक गुरु बन गए।

आपको बता दे ये पहले से ही खुले विचारों के व्यक्ति थे इन्हें कोई भी बात बोलने में कोई भी घबराहट महसूस नहीं होती थी, इनके अन्य आध्यात्मिक गुरुओं से अलग विचार एवं अलग सोच थी जो इन्हें अलग बनाती थी। इन्होंने सेक्स पर आधारित उपदेश देने के लिए वर्ष 1968 में एक शृंखला आयोजन किया था। इन्हें भारत में सेक्स गुरु के नाम से जाना जाता था क्योंकि इन्होंने वर्ष 1968 के पश्चात फ्रॉम सेक्स टू सुपरकोनियनेस को प्रकाशित किया था।

इसके बाद ये लोगों को ध्यान से जुड़ी बातें बताते थे और वर्ष 1970 में इन्होंने कई ध्यान विधियों को प्रतिपादित किया। ओशो कहते थे यदि आप इन विधियों से ध्यान करते है तो आपको धर्मशास्त्र एवं दिव्यज्ञान हासिल होगा। इसके बाद इन्हें लोग भगवान समझने लगे और इन्हें भगवान श्री रजनीश कहा जाने लगा। इन्होंने ध्यान लगाने के करीबन 100 से अधिक तरीके बताए थे। इनका मानना था जब तक आप भौतिक संसार में सब कुछ नहीं त्याग देते तब तक आप सन्यास नहीं ले सकते है। ये जैन तंत्र एवं सूफीवाद के विषयों पर चर्चा करके भाषण देते थे। इन्हें अंग्रेजी भाषा का भी अच्छा ज्ञान था तो कभी ये हिंदी में तो कभी अंग्रेजी में अपने भाषणों को देते थे।

अमेरिकी प्रवास जीवन

वर्ष 1990 में ये भारत से अमेरिका चले गए थे और यहां जानकार इन्होंने अमेरिकी प्रान्त ओरेगॉन में रजनीशपुरम आश्रम करीबन 65000 एकड़ भूमि क्षेत्र पर स्थापित किया था। अमेरिका में रहने के दौरान इन पर कई विवाद किए थे जिसके कारण इनका जीवन विवादस्पद रहा। ये हमेशा से डिजाइनिंग कपड़े, महंगे वाहनों को लेकर संदेहास्पद में रहते थे। इसके पश्चात ये वर्ष 1985 में ये अमेरिका छोड़कर अन्य देशों की यात्राओं के लिए निकल पड़ें। परन्तु इनके 21 देशों में रहने के लिए अमेरिका सरकार द्वारा पाबंदी लगा दी गई थी इसके कारण इन्हें वापस भारत आना पड़ा।

मृत्यु

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ओशो दिल की बीमारी से पीड़ित थे, 19 जनवरी 1990 को उन्हें दिल का दौरा पड़ा और इन्होंने आखिरी साँस ली और इस दुनिया को अलविदा कहकर हमेशा के लिए चले गए। 19 जनवरी सांध्य सभा में इसकी सूचना दी गई कि इनकी मृत्यु हो गई है। इन्होंने मरने से पहले अपनी अंतिम इच्छा को बताया था कि जब इनकी मृत्यु हो जाएगी तो इनका कोई भी प्रेमी शोक नहीं मनाएगा और ना हो रोएगा, उन्हें किसी भी बात का दुख नहीं होना चाहिए। मेरी मृत्यु को एक त्यौहार की तरह मनाया जाएगा। सभी लोगों ने ख़ुशी-खुशी उनकी शव यात्रा निकाली।

ओशो जीवनी से सम्बंधित प्रश्न/उत्तर

ओशो का जन्म कब हुआ था?

इनका जन्म मध्यप्रदेश राज्य के रायसेन में 11 दिसंबर 1931 को हुआ था।

ओशो का वास्तविक नाम क्या था?

इनका वास्तविक नाम चंद्र मोहन जैन था।

चंद्र मोहन जैन के माता-पिता का क्या नाम था?

इनकी माता का नाम बाई जैन तथा पिता का नाम बाबूलाल जैन था।

OSHO कौन

आध्यात्मिक शिक्षक एवं रजनीश आंदोलन के नेता

क्या OSHO की शादी हुई थी?

नहीं, ये अविवाहित थे।

OSHO का निधन कब हुआ था?

इनका निधन 19 जनवरी 1990 को महाराष्ट्र के पुणे में 58 वर्ष की आयु में हुआ था।

इस लेख में हमने Biography of OSHO in Hindi Jivani से सम्बंधित सम्पूर्ण जानकारी को साझा कर दिया है, यदि आपको इस लेख से जुड़ी अन्य जानकारी या प्रश्न पूछना चाहते है तो आप नीचे दिए हुए कमेंट बॉक्स में अपना मैसेज लिख सकते है, हम कोशिश करेंगे कि आपके प्रश्नों का उत्तर जल्द दे पाएं। आशा करते हैं कि आपको हमारा यह लेख पसंद आया हो और इससे जुड़ी जानकारी प्राप्त करने में सहायता प्राप्त हुई हो। इसी तरह के अन्य लेखों की जानकारी प्राप्त करने के लिए हमारी साइट hindi.nvshq.org से जुड़े रहें।

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