गाडगे महाराज जीवनी – Biography of Gadge Maharaj in Hindi Jivani

आज हम आपको देवीदास डेबुजी जानोरकर के बारे में बताने जा रहे है। इन्हें समाज में लोग गाडगे महाराज अथवा गाडगे बाबा कहकर पुकारते थे तथा इनकी प्रसिद्धि इसी नाम से थी। तथा समाज में इनका नाम समाज सुधारक के रूप में जाना जाता था। इन्होंने लोगों की भलाई के लिए कई सुधार किये। अपने ... Read more

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Reported by Saloni Uniyal

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आज हम आपको देवीदास डेबुजी जानोरकर के बारे में बताने जा रहे है। इन्हें समाज में लोग गाडगे महाराज अथवा गाडगे बाबा कहकर पुकारते थे तथा इनकी प्रसिद्धि इसी नाम से थी। तथा समाज में इनका नाम समाज सुधारक के रूप में जाना जाता था। इन्होंने लोगों की भलाई के लिए कई सुधार किये। अपने समय में इन्होंने महाराष्ट्र के गांव में कई विकास किए, संगठनों का निर्माण किया जिससे शासक और राजनेता भी प्रभावित हुए। आज के समय में इनके नाम पर कई स्कूल और कॉलेजों को निर्माण किया गया है तथा कई संस्थाएं भी बनाई गई है। 20वीं शताब्दी के समाज सुधार आन्दोलनों में इनका नाम भी आता है। आज इस आर्टिकल में हम आपको गाडगे महाराज जीवनी (Biography of Gadge Maharaj in Hindi Jivani) से सम्बंधित प्रत्येक जानकारी को साझा करने वाले है, इच्छुक नागरिक जानकारी प्राप्त करने के लिए इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें।

गाडगे महाराज का जीवन परिचय

गाडगे महाराज का जन्म महाराष्ट्र में अमरावती जिले के शेंडगाव में 23 फरवरी 1876 को हुआ था। इनका पूरा नाम देवीदास डेबुजी जानोरकर था बचपन में इन्हें यही कहकर बुलाते थे। इनका जन्म एक बहुत गरीब परिवार में हुआ था जो कि एक धोबी जाति वर्ग का था। इनके पिता का नाम झिंगरजी जानोरकर तथा माता का नाम सखुबाई था। बचपन में ही इनके पिता झिंगरजी जानोरकर का निधन हो गया था जिसके कारण इन्हें बहुत समस्याओं का सामना करना पड़ा। इनका रख-रखाव एवं लालन-पालन इनके नाना जी ने ही किया था। अपने नाना के साथ ये खेतीबाड़ी का कार्य एवं मवेशियां चराए करते थे।

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Biography of Gadge Maharaj in Hindi Jivani

नामगाडगे महाराज
पूरा नामदेवीदास डेबुजी जानोरकर
जन्म23 फरवरी 1876
जन्म स्थानशेंडगाव, महाराष्ट्र
पेशाआधयात्मिक गुरु
माता का नामसखुबाई
पिता का नामझिंगरजी जानोरकर
मृत्यु20 दिसंबर 1956
मृत्यु स्थानअमरावती
नागरिकताभारतीय
गाडगे महाराज जीवनी - Biography of Gadge Maharaj in Hindi Jivani
गाडगे महाराज जीवनी

विवाह

वर्ष 1892 में इनका विवाह हो गया था तथा इनके तीन बच्चे हुए थे। जब इनकी बेटी हुई थी तो इन्होंने नामकरण के समय में मेहमानों को शराब के बदले शुद्ध शाकाहारी खाना तथा मीठा खिलाया था। संत बनने से पहले इन्होंने अपने गांव में अनेक सामाजिक कार्य किए और उसके पश्चात 1 फरवरी 1905 को इन्होंने अपना परिवार छोड़ दिया और ये एक संत बन गए।

सामाजिक कार्य

देवीदास डेबुजी जानोरकर एक संत होने के साथ समाज सुधारक थे। वे समाज सेवा के लिए इधर-उधर भटकते रहते थे। टूटी हुई चप्पल पहने और हाथ में मिट्टी का कटोरा लेकर पैदल ही घूमते-फिरते थे। अकसर गांव में यह नालों एवं सड़कों की सफाई करते हुए दिख जाते थे। सफाई होने के बाद वे अपनी प्रशंसा करने के बदले गांव वालों को शुक्रिया कहते थे। यह काम करके गांव वाले उन्हें पैसे भी देते थे जिनका इस्तेमाल बाबा ने सामाजिक विकास के लिए किया था। उन्होंने धन को इकट्ठा करके गांव में अस्पताल, धर्मशाला तथा विद्यालयों का निर्माण भी कराया था।

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वे जब समाज सेवा कर देते थे उसके पश्चात वे कीर्तन गाते हो थे इसके लिए सम्मेलनों का आयोजन करते थे वे लोगों को भजन के माध्यम से जागरूक करते थे कि समाज सेवा से हम सबका कल्याण होगा। बाद में उन्होंने कई स्थानों पर अस्पताल, हॉस्टल, धर्मशालाएं तथा स्कूल भी स्थापित करवाए थे।

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उन्होंने इन संस्थाओं का निर्माण करने के लिए भीख मांग कर धन इकट्ठा किया था। समाज में इतना सब करने के बाद भी उन्होंने अपने निवास के लिए किसी भी घर का निर्माण नहीं कराया। वे पेड़ के नीचे या धर्मशालाओं के छतों पर रहते थे। इसके अतिरिक्त उस समय डॉ. भीमराव आंबेडकर समाज सुधार का काम कर रहे थे और बाबा कीर्तन में भजन गा कर लोगों को सामाजिक कार्य का उपदेश सुनाया करते थे। बाबा और आम्बेडकर दोनों समय-समय पर मिलते रहते थे और आपस में बैठकर एक दूसरे की सलाह लेते थे। बाबा अकेले ही समाज में सेवा करते थे उनको कोई भी शिष्य नहीं था वे अपने आप कही भी अकेले जाते थे और यात्रा करते थे।

उपलब्धियां

जैसा कि हमने आपको बताया कि जानोरकर ने अपने सम्पूर्ण जीवन में समाज सेवा की जिसके लिए भारत सरकार द्वारा उनको कई सम्मान एवं पुरस्कारों से सम्मानित किया है। वर्ष 2000 में गाडगे बाबा ग्राम स्वच्छता अभियान पुरस्कार को महाराष्ट्र राज्य सरकार द्वारा शुरू किया गया था, यह पुरस्कार उन व्यक्तियों को ही प्रदान किया जाता है जो गांवों में सफाई करने में भागीदार होते है, अथवा भाग लेते है। इसके अतिरिक्त इनके नाम पर संत गाडगे बाबा अमरावती विश्विद्यालय का नाम रखा हुआ है यह महाराष्ट्र राज्य के अमरावती यूनिवर्सिटी है। गाडगे ने अपने समय में गाडगे महाराज मिशन को स्थापित किया था जिसमें वर्तमान समय में 31 स्कूल एवं कॉलेज, छात्रावास तथा 12 धर्मशालाएं में समाज सेवा का कार्य अभी भी किया जा रहा है।

संत गाडगे बाबा नाम की उपाधि

देवीदास डेबुजी जानोरकर एक संत थे और वे अपने पास एक मिट्टी का बर्तन रखते थे। और आपको बता दे मिट्टी के बर्तन को महाराष्ट्र राज्य में गडगा कहा जाता है, और मिट्टी का बर्तन हमेशा पास होने के कारण लोग उनको गाडगे बाबा कह कर पुकारते थे और धीरे-धीरे कर लोग उनको संत गाडके बाबा के नाम से ही बुलाने लगे और उनको इसी नाम से जाने जाना लगा।

डॉ. भीमराव अम्बेडकर के समीप

देवीदास डेबुजी जानोरकर आंबेडकर के विचारों से बहुत प्रभावित हुए थे। बाबा से आंबेडकर करीबन 15 छोटे तो अवश्य थे परन्तु बाबा उनकी समाज सेवा से बहुत प्रभावित थे। बाबा लोगों को कीर्तन गाकर समाज सेवा एवं सामाजिक कार्य करने को प्रेरित करते थे और भजन के माध्यम से उपदेश देते थे। और इसी कार्य को राजनीति के जरिये भीमराव करते थे।

भीमराव एक सामाजिक सेवाकार थे जो साधु संतों से ज्यादा अधिक बात नहीं करते थे और बाबा स्वयं एक संत थे इसलिए उनका ज्यादा प्रभाव साधु-संतों के साथ ही रहता था। परन्तु भीमराव बहुत बार बाबा से मिले थे और समय पड़ने पर उनसे मिलने जाया करते थे वे दोनों आपस में मिलकर समाज सेवा के लिए बातचीत करते थे। अर्थात वे दोनों एक दूसरे के बहुत क़रीब थे।

Gadge Maharaj अनमोल विचार

Gadge Maharaj ने अपने जीवन में कई सामाजिक कार्य किए तथा उनके कई अनमोल विचार भी जिन्हें हमने नीचे निम्न प्रकार से बताया है।

  • समाज में स्वच्छता लाओ
  • भूखे को अन्न दो
  • बेघरों को आश्रय दो
  • प्यासे को पानी पिलाओ
  • निराश और दुखी जनों की हिम्मत बढ़ाओ
  • पशु पक्षियों की सुरक्षा करो
  • निर्वस्त्र को कपड़े दो
  • गरीब युवक-युवतियों का विवाह करवाओ
  • गरीब बच्चों को शिक्षा दो
  • बेरोजगारों को आश्रय दो
  • अंधे निशक्तजन एवं रोगियों का उपचार कराओ

मृत्यु

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इनकी मृत्यु 20 दिसंबर 1956 को अमरावती में हुई थे। यह अमरावती में यात्रा कर रहे थे उस दौरान इनका निधन हो गया। इन्होंने मृत्यु से पहले अपने अनुयायियों से कहा था यदि किसी भी स्थान में मेरी मृत्यु हो जाए तो वही तुम मेरा अंतिम संस्कार भी कर देना। मेरी किसी भी प्रकार की समाधि स्थल के रूप में स्मारक, मूर्ति या कोई भी मंदिर नहीं बनाना है। जिस स्थान पर उनकी मृत्यु हुई थी और अंतिम संस्कार किया उसी स्थान को वर्तमान समय में गाडके नगर के नाम से जाना जाता है।

गाडगे महाराज जीवनी से सम्बंधित सवाल/जवाब

गाडगे महाराज का जन्म कब हुआ था?

इनका जन्म 23 फरवरी 1876 को महाराष्ट्र राज्य के शेंडगाव में हुआ था।

गाडगे महाराज का वास्तविक नाम क्या था?

इनका वास्तविक नाम देवीदास डेबुजी जानोरकर था।

देवीदास डेबुजी जानोरकर की मृत्यु कब हुई?

देवीदास डेबुजी जानोरकर की मृत्यु अमरावती में 20 दिसंबर 1956 को हुई थी।

देवीदास डेबुजी जानोरकर के पिता का नाम क्या था?

इनके पिता का नाम झिंगरजी जानोरकर था।

देवीदास डेबुजी जानोरकर की नागरिकता क्या थी?

यह एक भारतीय थे।

देवीदास डेबुजी जानोरकर की माता का नाम क्या था?

इनकी माता का नाम सखुबाई था

Gadge Maharaj कौन थे?

Gadge Maharaj 20वीं शताब्दी के समाज सुधारक थे। लोगों की भलाई के लिए इन्होने कई महत्वपूर्ण काम किए, सामाजिक कार्यों एवं समाज सेवा के लिए इनका नाम आज भी जाना जाता है।

इस लेख में हमने Biography of Gadge Maharaj in Hindi Jivani से सम्बंधित सम्पूर्ण जानकारी को साझा कर दिया है। यदि आप लेख से सम्बंधित कोई अन्य जानकारी या प्रश्न पूछना चाहते है तो आप नीचे दिए हुए कमेंट सेक्शन में अपना प्रश्न लिंक सकते है हमारी टीम द्वारा जल्द ही आपके प्रश्नों का उत्तर देने का प्रयास किया जाएगा। उम्मीद करते है कि आपको हमारे द्वारा लिखे गए लेख से जानकारी जानने में सहायता मिली हो एवं लेख पसंद आया हो। इसी तरह की जानकारी पाने के लिए हमारी साइट से ऐसे ही जुड़े रहे।

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