कंप्यूटर क्या है – विशेषताएं, परिभाषा, कार्य, प्रकार और उपयोगिता

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Reported by Dhruv Gotra

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कंप्यूटर तेजी से काम करने वाली एक ऐसी डिवाइस है। जो कम से कम समय में हमें बेहतर आउटपुट देती है। आज के समय में कंप्यूटर के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। आप यह देखें की Computer की उपयोगिता आज के समय में बहुत बढ़ गयी है। आज आपको कोई भी कार्य जैसे ऑनलाइन शॉपिंग, बिजली बिल भुगतान, मोबाइल रिचार्ज, रेलवे/फ्लाइट टिकट बुकिंग आदि कुछ भी करना हो।

कंप्यूटर की मदद से आसानी से किया जा सकता है। दोस्तों जब कंप्यूटर की बात हो रही है तो कंप्यूटर क्या है Computer (कंप्यूटर) के इतिहास, प्रकार, उपयोग, कार्य, विशेषता आदि के बारे में जरूरी हो जाता है। आज के आर्टिकल में हम आपके लिए कंप्यूटर की इन्हीं सब जानकारियों से संबंधित सूचनाएं लेकर आये हैं। कंप्यूटर के बारे में और अधिक जानने एवं समझने के लिए हम आपसे कहेंगे की आर्टिकल को ध्यानपूर्वक अंत तक जरूर पढ़ें।

कंप्यूटर क्या है विशेषताएं, परिभाषा, कार्य, प्रकार और उपयोगिता
कंप्यूटर क्या है विशेषताएं, परिभाषा, कार्य, प्रकार और उपयोगिता

कंप्यूटर का इतिहास (History of Computer):

कम्प्यूटर का इतिहास 16वीं शताब्दी से शुरू माना जाता है। शुरुआत में मानव ने अपनी सभ्यता के विकास के दौरान Abacas (अबैकस) नामक लकड़ी के कंप्यूटर से की थी। आगे आर्टिकल में हमने कंप्यूटर के इतिहास की विस्तृत जानकारी आपको प्रदान की है आप पढ़ सकते हैं –

Abacus (अबैकस)- 1602 ईस्वी:

Abacus computer history
Abacus (अबेकस) कंप्यूटर
  • दोस्तों पुराने समय में अबेकस एक लकड़ी से बना कंप्यूटर था जो सामान्य सी गणनाओं का उपयोग करने के लिए उपयोग किया जाता था। उस समय के अनुसार इस कंप्यूटर से गणितीय गणनाएं करना सबसे सही माना जाता था।
  • अबेकस कंप्यूटर में पतली लकड़ियों से बने खांचों में रंग-बिरंगे पत्थर या काले लकड़ी के गुटके लगे रहते थे। इसमें पत्थरों को लकड़ी के ऊपर खिसका कर ऊपर नीचे किया जाता था।
  • पत्थरों के ऊपर नीचे खिसकाने के तरीकों से ही इस कंप्यूटर में गणनाओं को किया जाता था।

John Napier’s Bone (जॉन नेपियर की हड्डी):

John Napier Bone computer
John Napier Bone computer
  • अबेकस के बाद किसी दूसरे कंप्यूटर का जिक्र आता है जो उसका नाम है John Napier Bone computer इस कंप्यूटर का अविष्कार सत्रहवीं शताब्दी में किया गया था।
  • जॉन नेपियर कंप्यूटर पर एक हड्डी के ऊपर अंक लिखे होते थे। यह हड्डियां हांथी के दांत या किसी अन्य जानवर की होती थीं। इन अंकों के माध्यम से गणनाओं के जोड़, घटाव, गुणा आदि को कैलकुलेट किया जाता था। वैज्ञानिकों के अनुसार इस तरह की मशीन को Cardboard Multiplication Calculator भी कहा जाता है।
  • आपको पता दें की इस मैकेनिकल कंप्यूटर को बनाने वाले John Napier एक महान फिजिशियन और गणितज्ञ थे। इस मशीन में गुणा-भाग करने के लिए 9 तरह के अलग हड्डियों को उपयोग किया जाता था। John Napier कंप्यूटर को सन 1890 ईस्वी में विकसित किया गया था।
Pascaline (पास्कलाइन):
Arithmetic-Machine-The-Pascaline-French-Blaise-Pascal computer
अर्थमेटिक मशीन द ब्लेज़ पास्कल कंप्यूटर
  • अर्थमेटिक मशीन कंप्यूटर को सन 1942 में फ्रांस के महान गणितज्ञ (Mathematician) ब्लेज़ पास्कल (Blaise Pasca) ने की थी। यह मशीन यांत्रिक ऑपरेशन के तहत अंकों को जोड़ने एवं घटाने का काम करती थी।
  • दुनिया में बनने वाली मैकेनिकल मशीन घड़ी और ओडोमीटर सब पास्कल कंप्यूटर के सिद्धांत पर कार्य करती हैं। पास्कल के द्वारा बनाये जाने के कारण इस कंप्यूटर मशीन को पास्कलाइन कंप्यूटर कहा गया।
  • इसके बाद वर्ष 1944 में इंग्लैंड के कोलोसस में मार्क-2 (Mark-2) कंप्यूटर को दुनिया के सामने रखा गया।
  • वर्ष 1947 में कंप्यूटर के विकास निर्माण हेतु एसोसिएसन फॉर कंप्यूटिंग मशीनरी का गठन किया गया।
  • इसी क्रम में आगे बढ़ते हुए IBM कम्पनी ने दुनिया का पहला 604 इलेक्ट्रॉनिक कैलकुलेटर कंप्यूटर को बनाया।
  • वर्ष 1972 इंटीग्रेटेड सर्किट के अविष्कार के बाद इंटेल कम्पनी ने दुनिया का पहला माइक्रो प्रोसेसर बेस्ड कंप्यूटर लांच किया जो छोटी सी माइक्रो प्रोसेसर चिप के ऊपर चलता था।
  • वर्ष 1977 में Apple कंप्यूटर कम्पनी ने लोगों के पर्सनल उपयोग के लिए एप्पल-2 पर्सनल कंप्यूटर को लांच किया।
  • इसके बाद वर्ष 1992 में पर्सनल कंप्यूटर के लिए सबसे बेस्ट ऑपरेटिंग सिस्टम माने जाने वाला विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम को बिल गेट्स की माइक्रोसॉफ्ट कंपनी के द्वारा लांच किया गया।

Generation of Computer (कंप्यूटर की पीढ़ियां):

आप नीचे दी गई टेबल में अब तक के कंप्यूटर की सभी generation के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं –

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क्रम. संख्या पीढ़ी (Generation)काल (Time)तकनीक (Technology)
1.प्रथम पीढ़ी1942-1955वैक्यूम ट्यूब
2.द्वितीय पीढ़ी1955-1964ट्रांजिस्टर
3.तृतीय पीढ़ी1964-1975IC (integrated Circuit)
4.चतुर्थ पीढ़ी1975-1990VLSI
5.पंचम पीढ़ी1990-अब तकULSIC With AI

Computer (कंप्यूटर) क्या है ?

  • परिभाषा (Definition): कंप्यूटर की एक सरल परिभाषा की बात करें तो Computer एक Electronics (इलेट्रॉनिक्स) मशीन है। जो यूजर के द्वारा इनपुट माध्यम से दिए गए आंकड़ों को प्रोग्राम के निर्देशों की श्रृंखला के अनुसार डाटा को प्रोसेस करके यूजर को सुचना या परिणाम (Result) उपलब्ध करवाता है। इस परिणाम को हम output (आउटपुट) कहते हैं।
  • कंप्यूटर के मुख्यतः दो अंग होते हैं जिस पर यह पूरा सिस्टम काम करता है –
    • मदर बोर्ड (Mother Board): किसी भी कंप्यूटर का मुख्य सर्किट बोर्ड मदर बोर्ड कहलाता है। इस बोर्ड में वाई-फाई, ग्राफ़िक्स कार्ड, ब्लूटूथ आदि से संबंधित छोटे-छोटे सर्किट लगे मिल जाएंगे। मदर बोर्ड आपको टेबलेट, लैपटॉप, डेस्कटॉप आदि में लगा हुआ देखने को मिल जाएगा। मदर बोर्ड कंप्यूटर में लगा चिपसेट होता है। यह एक तरह का प्रिंटेड सर्किट बोर्ड होता है। मदर बोर्ड को कंप्यूटर का मेन बोर्ड या सिस्टम बोर्ड भी कहा जाता है। मदर बोर्ड में आपको CPU, माइक्रोप्रोसेसर, सिस्टम मेमोरी, की-बोर्ड, डिस्क ड्राइव आदि कॉम्पोनेन्ट देखने को मिल जाते हैं।
    • मदरबोर्ड के साथ काम करने वाले कपोनेन्ट के नाम इस प्रकार से है –
      • प्रोसेसर सॉकेट
      • पॉवर कनेक्टर
      • मेमोरी स्लॉट
      • विडियो कार्ड स्लॉट
      • एक्सपेंशन स्लॉट
      • CMOS बैटरी
      • नार्थब्रिज और साउथब्रिज
      • ईटरनेट पोर्ट
      • कीबोर्ड पोर्ट
      • माउस पोर्ट
      • पेनड्राइव (Pendrive)
    • CPU (Central Processing Unit): CPU या जिसे हिंदी में केंद्रीय प्रक्रमन एकक भी कहा जाता है। यह कंप्यूटर का एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण भाग है। CPU कंप्यूटर का वह भाग होता है जिसमें कंप्यूटर में फीड प्रोग्राम्स को निर्देशानुसार एक्जिक्यूट किया जाता है। सी.पी.यू का कार्य होता है की सिस्टम और यूजर द्वारा बनाये गए प्रोग्राम फाइलों की कमांडस को सही तरीके से संचालित करना।
    • CPU मुख्यतः तीन भागों में बंटा होता है जो इस प्रकार से हैं –
      • Memory यूनिट
      • सेंट्रल यूनिट
      • Arithmetic Logic यूनिट

कंप्यूटर के प्रकार (Types of Computers):

types of computers
कंप्यूटर के प्रकार
  • प्रकार के आधार पर कंप्यूटर का वर्गीकरण: दोस्तों आपको बता दें Types के आधार पर कंप्यूटर को तीन भागों में विभाजित किया गया है। जिनके बारे में हमने आपको आगे आर्टिकल में बताया है –
    • एनालॉग कंप्यूटर (Analog Computer): एनालॉग कम्प्यूटर इस तरह के कंप्यूटर होते हैं जो भौतिक इकाई (Physical Unit) (जैसे: तापमान, दाब, उष्मा, लम्बाई, प्रकाश की तीव्रता आदि) को परिवर्तित करके अंकों में परिणाम प्रदर्शित करते हैं। एनालॉग कंप्यूटर का उपयोग हम विज्ञान और तकनीकी क्षेत्रों में बहुत ही देखने को मिलता है। यदि आपने वाहन में पेट्रोल या डीजल भरवाया होगा तो आप देखेंगे की पेट्रोल पंप में ऑपरेटर मशीन में अंकों को सेट कर बाद में वाहन में फ्यूल भरता है। पेट्रोल पंप में लगी मशीन एक एनालॉग कंप्यूटर का उदाहरण है।
    • डिजिटल कंप्यूटर (Digital Computer): आजकल के सभी कंप्यूटर डिजिटल कंप्यूटर की श्रेणी के तहत आते हैं। डिजिटल कंप्यूटर में ऑपरेशन को परफॉर्म करने के लिए मशीन लैंग्वेज कोड (1 और 0) का उपयोग किया जाता है। तकनीकी भाषा में 1 और 0 की इस भाषा को बाइनरी लैंग्वेज कहा जाता है। इस तरह के कंप्यूटर में लॉजिक गेट सर्किट बोर्ड का उपयोग किया जाता है। बैंक, रेलवे, शॉपिंग मॉल अधिकतर सभी जगह इन डिजिटल कंप्यूटर का उपयोग किया जाता है। डिजिटल कंप्यूटर यूजर द्वारा इनपुट को मशीन कोड भाषा में बदलकर उसे प्रोसेस कर इलेक्ट्रॉनिक रूप में बदलकर हमें मॉनिटर स्क्रीन पर आउटपुट को प्रदर्शित करते हैं
    • हाइब्रिड कंप्यूटर (Hybrid Computer): घर में उपयोग किये जाने वाले डेस्कटॉप कंप्यूटर (Hybrid Computer) के बेहतरीन उदाहरण हैं। यह कंप्यूटर एनालॉग और डिजिटल कंप्यूटर का मिला जुला स्वरुप हैं।आपने अस्पतालों में मरीजों के BP को नापने वाली मशीन देखी होगी जिसे हम हाइब्रिड कंप्यूटर का बेहतरीन उदाहरण कह सकते हैं। मशीन में एक पट्टे को रोगी के हाथ के चारों तरफ लपेट दिया जाता है फिर इसके बाद डॉक्टर के द्वारा प्रेसर बैलून से हवा का दाब बढ़ाया जाता है। हवा का दाब बढ़ने से रोगी की नसें टाइट हो जाती हैं जिसकी रीडिंग हमें डिजिटल पैनल में अंकों के रूप में दिखाई देती हैं।
  • साइज के आधार पर कंप्यूटर का वर्गीकरण: आपकी
    • माइक्रो कंप्यूटर (Micro Computer)
    • मिनी कंप्यूटर (Mini Computer)
    • मेनफ्रेम कंप्यूटर (Mainframe Computer):
    • सुपर कंप्यूटर (Supercomputer):
  • उपयोग के आधार पर कंप्यूटर का वर्गीकरण:
    • सामान्य उपयोग (General Purpose)
    • विशेष उपयोग (Special Purpose)

यह भी जानें:

कंप्यूटर की विशेषताएं:

आजकल के समय में कंप्यूटर का हम सबके जीवन में बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण उपयोग हो गया है। सबसे बड़ी बात यह है की कंप्यूटर की बहुत सारी विशेषताओं ने हमारे काम करने के तरीके को बदल रख दिया है। चलिए अब समझते हैं की कंप्यूटर उन सभी विशेषताओं के बारे में –

  1. कंप्यूटर की High Speed (उच्च गति): यह तो हम सभी जानते हैं की एक इंसान के बदले कंप्यूटर कहीं अधिक जल्दी और सटीक तरीके से गणनाएं कर सकता है। जिन गणनाओं को करने में एक इंसान कई दिन या महीनों का समय लगा सकता है वह सभी गणनाएं एक कंप्यूटर तेजी से पालक झपकते ही कर सकता है। यदि हम वैज्ञानिक तथ्यों के अनुसार बात करें तो जिस साधारण सी गणना को करने में एक इंसान को 60 से 80 सेकेण्ड का समय लगता है उसे एक कंप्यूटर 1 सेकेण्ड के कुछ हिस्से में पूरा कर सकता है। अब तो कंप्यूटर के प्रोसेसर इतने फ़ास्ट और तेज हैं की आप कोई भी कार्य चुटकियों में कर सकते हैं। यदि हम एक सुपरकंप्यूटर की बात करें तो इसकी गणना करने की स्पीड लगभग औसतन 630 मेगाफ्लॉप होती है। इसका मतलब यह हुआ की एक सुपर कंप्यूटर 1 सेकेण्ड में 1 ख़रब गणनाएं कर सकता है।
  2. Storage Capacity (संचय क्षमता): जब से कंप्यूटर आया है तब से data management और डाटा स्टोरेज की समस्या को हल किया जा चूका है। वैज्ञानिकों की माने तो एक सुपर कंप्यूटर की छोटी सी दिखने वाली चिप में आप दुनिया के डाटा को चार बार से अधिक बार स्टोर कर सकते हैं। कंप्यूटर की पहले की जेनरेशन में स्टोरेज हेतु ग्रामोफोन रिकॉर्ड की डिस्क की मैग्नेटिक डिस्क को यूज़ किया जाता था। लेकिन अब के कम्प्यूटर्स में SSD डिवाइस का उपयोग किया जाता है। यहां SSD का मतलब है Solid State Drive जो की एक तरह की माइक्रो चिप डिवाइस होती है जिसमें मैग्नेटिक स्टोरेज डिवाइस से ज्यादा डाटा स्टोर किया जा सकता है और मैग्नेटिक स्टोरेज डिवाइस के बदले SSD डिवाइस कहीं अधिक लम्बे समय तक उपयोग में लायी जा सकती है। आप 500 GB SSD ड्राइव में हमारे पुरातन 45,000 से भी अधिक ग्रथों, उपनिषदों आदि की जानकारी को स्टोर किया जा सकता है।
  3. विश्वसनीयता (Reliability): कंप्यूटर के कार्यों को सटीक तरीके से करने पर उसकी विश्वसनीयता और अधिक बढ़ जाती है। पुराने समय में उपयोग किये जाने वाले एनालॉग कंप्यूटर के कारण गणनाओं में गलती की प्रतिशत काफी अधिक हुआ करता था। लेकिन एनालॉग के बाद डिजिटल कंप्यूटर आने से अब कठिन से कठिन गणनाओं की गलती का प्रतिशत अब 0.1 % रह गया है। जो कंप्यूटर की विश्वसनीयता को बढ़ाता है। डिजिटल कंप्यूटर पर आप किसी भी टास्क और प्रोग्राम को बार-बार बिना गलती किये आसानी से कर सकते हैं। Computer की इस भरोसे मंद स्पीड ने गलती की सम्भावना को नगण्य कर दिया है।
  4. Automation (स्वचालन): अब के कंप्यूटर इतने एडवांस हो चुके हैं की वह से निर्णय लेकर यह तय कर सकते हैं क आने वाली समस्या से कैसे बचा जाय और समस्या को कैसे रोका जाय। आपने रोबोट , ऑटोमैटिक कार/गन आदि का संचालन देखा सब कंप्यूटर के ऑटोमेशन के बेहतरीन उदाहरण हैं। एनालॉग और डिजिटल कंप्यूटर के मिले-जुले रूप ने कंप्यूटर स्वचालन को सबके लिए आसान बना दिया है। स्वचालन के कारण ही कंप्यूटर में निर्णय लेने की क्षमता (Decision Power) की क्षमता का विकास हुआ है।
  5. AI (Artificial intelligence) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: आजकल के कंप्यूटर अपनी कृत्रिम बुद्धि के कारण बहुत ही ज्यादा स्मार्ट हो गए हैं। AI कंप्यूटर परिस्थितियों को समझकर अपने आप फैसला लेने में सक्षम हैं। उदाहरण के तौर हम देखें की आजकल के घरों में उपयोग होने वाले स्मार्ट स्विचेज की जो बिजली का उपयोग ना किये जाने पर बिजली बचाने हेतु स्वतः ही ऑफ हो जाते हैं। इसी तरह Smart AC में AI कंप्यूटर का प्रयोग किया जाता है जो जगह के अनुसार तापमान को नियंत्रित करता है।

कंप्यूटर के कार्य (Work of Computer):

कंप्यूटर एक मानव निर्मित मशीन हैं जिसे विभिन्न कार्यों के उद्देश्य हेतु निर्मित किया गया है। कंप्यूटर के द्वारा किये जाने वाले कार्य मुख्य रूप से इस प्रकार हैं –

  • इनपुट किये गए आंकड़ों का संकलन तथा निवेशन
  • आकड़ों को कंप्यूटर की मेमोरी में दर्ज कर आंकड़ों का संचयन (Storage)
  • कंप्यूटर में मौजूद आंकड़ों का संसाधन (Processing)
  • डाटा के द्वारा प्राप्त जानकारियों को निर्गमन एवं पुन निर्गमन करना (Output and Retrieval) आंकड़े में मौजूद जानकारियों के डाटा को मुद्रित, लिखित, दृश्य, श्रव्य, आरेखित रूप में प्रदर्शित करना।

कंप्यूटर के द्वारा किये जाने कार्यों निम्नलिखित इकाइयों के माध्यम से संपन्न किया जाता है जो इस प्रकार से हैं –

  • निवेश इकाई (Input Unit)
  • बाह्य स्मृति इकाई (External Memory Unit)
  • केंद्रीय संसाधन इकाई (Central Processing Unit – CPU)
  • निर्गम इकाई (Output Unit)

Computer की उपयोगिता (Utility):

दोस्तों आजकल के समय में हम देखते हैं की हर क्षेत्र में कंप्यूटर का बहुतायत में उपयोग किया जाता है। आप देखें की शॉपिंग मॉल, रेलवे स्टेशन, बैंक, एयरपोर्ट आदि हर जगह कंप्यूटर का उपयोग किया जा रहा है। कंप्यूटर ने हमारे काम करने के तरीके को बदल के रख दिया है। आजकल हर व्यक्ति चाहता है की उसका काम जल्द से जल्द सही तरीके से हो जो की बिना कंप्यूटर के सहायता से किया जाना सम्भव नहीं है। इसलिए आज के समय में कंप्यूटर मानव की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है।

  • स्कूलों में कंप्यूटर का उपयोग: आप देखेंगे की स्कूल/ कॉलेज में बच्चों के डाटा को मैनेज करना हो, परीक्षा का टाइम टेबल बनाना हो, रिजल्ट जारी करना हो सभी के लिए कंप्यूटर की आवश्यकता है। बिना कंप्यूटर के इस तरह के कार्यों को करना असंभव सी बात लगती है।
  • बैंकिंग क्षेत्र में कंप्यूटर का उपयोग: बैंक में कर्मचारियों की तनख्वाह से संबंधित लेखा जोखा हो। एक बैंक से दूसरे बैंक का वित्तीय लेन देन हो, लोन से जुड़ी जानकारियां हों सब कुछ कंप्यूटर के द्वारा मैनेज किया जाता है। बैंकिंग क्षेत्र में कंप्यूटर आने यह सिस्टम पारदर्शी और विश्वसनीय हुआ है। बैंक में कंप्यूटर का उपयोग होने से बैंकिंग क्षेत्र में लोगों का विश्वास और अधिक बढ़ा है।
  • रेलवे में कंप्यूटर का उपयोग: दोस्तों जब भी आपने रेल से यात्रा करने के लिए टिकट बुक कराया होगा तो आपने देखा होगा की टिकट काउंटर पर रेलवे अधिकारी कैसे कंप्यूटर की सहायता से मिनटों में ही बहुत बड़ी संख्या में टिकट बुक कर देता है। इससे आप समझ सकते हैं की कंप्यूटर ने रेलवे की काम करने की प्रक्रिया को तेज और आसान बनाया है। अब तो आप अपने कंप्यूटर/मोबाइल पर घर बैठे रेलवे की ट्रेन, टिकट आदि से संबंधित जानकारियां चेक कर सकते हैं।
  • अस्पतालों में कंप्यूटर का उपयोग: हम अक्सर देखते हैं की अस्पतालों में MRI, X-Ray, लेजर ऑपरेशन आदि कुछ भी कराना हो सब कंप्यूटर की मदद से किया जाता है। कंप्यूटर की मदद से अब किसी के शरीर में बड़ी से बड़ी और गंभीर बीमारी का पता लगाकर उसका समय रहते इलाज किया जा सकता है।
  • ऑफिस/कार्यालयों में कंप्यूटर का उपयोग: यदि हम ऑफिस के संबंध में बात करें तो लेटर राइटिंग, प्रिंट, एडिटिंग, मेल सेंड करना यह सब कार्य कंप्यूटर के कारण अब बिना किसी गलती के बहुत तेजी से होने लगे हैं। कंप्यूटर की सहायता से अब कर्मचारियों से संबंधित डाटा को मैनेज करना आसान हो गया है।
  • मनोरंजन के क्षेत्र में कंप्यूटर का उपयोग: मनोरंजन के क्षेत्र में कंप्यूटर का उपयोग होने से यह सेक्टर पूरी तरह से बदल चुका है। आप फिल्म निर्माण, एडिटिंग, प्रोडक्शन आदि किसी भी क्षेत्र की बात करें। टेक्नोलॉजी ने हमारे फिल्म देखने को अनुभव को बदलकर रख दिया है। कंप्यूटर के कारण ही फिल्मों में संगीत देना बहुत ही आसान हो गया है।

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Computer की खोज कब और किसने की ?

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कंप्यूटर की खोज का श्रेय इंग्लिश गणितज्ञ चार्ल्स बैबेज की दिया जाता है। उन्होंने कंप्यूटर की खोज 1837 में मैकेनिकल कंप्यूटर इंजन बना के की थी।

कंप्यूटर को हिंदी में क्या कहते हैं

कंप्यूटर को हिंदी भाषा में संगणक कहा जाता है।

COMPUTER की फुल फॉर्म क्या है ?

COMPUTER (कंप्यूटर) ka full form: Common Operating Machine Purposely used for Technological and Educational Research

देश में कंप्यूटर की शुरुआत कब हुई ?

आपको बताते चलें की देश में कंप्यूटर की शुरुआत कोलकाता के भारतीय सांख्यिकी संस्थान में सन 1942 में एक एनालॉग कंप्यूटर की स्थापना से हुई थी।

प्रथम संयुक्त कंप्यूटर सम्मेलन का कब और कहाँ हुआ था ?

प्रथम संयुक्त कंप्यूटर सम्मेलन संयुक्त राज्य अमेरिका में 1953 में आयोजित किया गया था।

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